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इस जवान से सबक लेंगे सियासी रहनुमा!

आप हमलावरों से घिरे हों, आपके देश के खिलाफ नारे लग रहे हों, आपको लोग गालियां दे रहे हों, पत्थर मार रहे हों, हाथापाई कर रहे हों! क्या ये संभव है कि आप कोई प्रतिक्रिया तक न करें! और वो भी तब जब आप उन लोगों से ताकतवर हों, समाज और कानून आपके लिए खड़ा होने को तैयार हो, साथ ही आपके पास असलहा, गोली बारूद हो! किसी भी इंसान के लिए खुद पर इतना संयम रखना मुमकिन नहीं है। इतना सब्र…! खुद पर इतना नियंत्रण करना तब तो वाकई काबिले तारीफ है जब ऐसा आप निजी स्वार्थ की खातिर न करें।





हर तरह से जलील होकर भी ऐसे हालात में घिरे सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों, खासतौर से विक्की बिस्वकर्मा ने कश्मीर में जिस तरह खुद को काबू में रखा उस जज्बे को सलाम करने का मन क्यूं न चाहेगा। बिस्वकर्मा ने इतना संयम दिखाया तो ज्यादातर लोगों को पहले पहल तो बेवकूफी ही लगी लेकिन जब बिस्वकर्मा की जुबान से असल वजह, उसकी सोच का पता चला तो हर हिन्दुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा हुआ। विक्की ने कहा-‘हमारे पास इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें थीं। हमारी प्रतिक्रिया से बवाल हो सकता था और ऐसे में उपद्रवी मशीनों को लूट या नुकसान पहुंचा सकते थे।’

सीआरपीएफ के इस जवान की सोच में EVM महज वोटिंग मशीन नहीं थी। वह सिर्फ मशीन की सुरक्षा नहीं कर रहा था। असल में मशीन में बंद उस फैसले की सुरक्षा कर रहा था जो देश के उस हिस्से के मतदाताओं ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दिया था। विक्की की ये सोच लोकतंत्र के प्रति आस्था और मतदाताओं के फैसले की न सिर्फ अहमियत दर्शाती है वरन यह भी साबित करती है कि इनके प्रति वह सम्मान से कितना लबालब है।

संबलपुर (ओडिशा) में अपने माता-पिता के साथ विक्की बिस्वकर्मा

बिस्वकर्मा ओडिशा के एक दूर प्रांत के देहाती परिवेश से आया नौजवान है। महज सिपाही। लेकिन उसकी सोच के दायरे ने उन बड़े-बड़े सियासी सूरमाओं की घटिया सोच को ऐसी औकात दिखाई जो सलाम से भी काफी ऊंचे जज्बे की हकदार है। विक्की बिस्वकर्मा ने जब ये किया तब देश उबल रहा था, उपद्रवियों के प्रति नफरत बढ़ रही थी और टीवी पर चलती तस्वीरें देखकर हर भारतीय का खून खौल रहा था। साथ ही विक्की बिस्वकर्मा और उसके साथ बड़गाम के कच्चे पक्के गलीनुमा रास्ते पर चलते जवानों के प्रति तरस आ रहा था।

बिस्वकर्मा ने बेहद ऊंचे दर्जे की सोच और समझदारी का जैसा प्रदर्शन किया उसकी आमतौर पर इस स्तर के कर्मी से उम्मीद नहीं की जाती। लेकिन उसका ये कहना इस सिपाही के साथ सीआरपीएफ के लिए भी गौरव बढ़ा देता है-हमें हर हाल में संयम बरतना और शांत रहना भी सिखाया जाता है।

सही मायने में विक्की सीआरपीएफ का ही नहीं लोकतंत्र का भी सच्चा प्रहरी बनकर निकला है। ये घटना उन लोगों के लिए बड़ा सबक है जो लोकतंत्र में मतदान को महज सत्ता पाने की प्रक्रिया समझते हैं और सत्ता सुख भोगने की मानसिकता से ग्रस्त हैं। ऐसे लोगों को शायद ही ये घटना शर्मसार करे लेकिन ताकतवर होने के बावजूद जलालत सहते हुए संतुलन बरकरार रखने की ये घटना बेनजीर है। हो सकता है सुरक्षा बलों के जवानों की ट्रेनिंग के दौरान ये वीडियो दिखाया जाए और इसकी व्याख्या भी की जाए। लेकिन क्या इस देश के सियासी रहनुमा भी इससे सबक लेंगे…? वोट बैंक वाली संकुचित सोच बदलेंगे?

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