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निर्मला को मिला बेहद चुनौती भरा पद

दिनेश-तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)

देश की नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को मिला नया पद बेहद चुनौती, ऊंचे लक्ष्य और असीम दायित्वों से भरा है। विश्व राजनीति के क्षितिज पर भारत आज जिस तरह ताकतवर तथा सैन्य कुशलता की मर्यादित छवि बना रहा है उससे दुनिया की निगाहें एशिया महाद्वीप के इस देश पर टिकी हैं। हाल ही में भूटान के दावे वाले डोका ला में भारत और चीन की सेनाओं की वापसी भारतीय सेना तथा भारतीय कूटनीति की बड़ी कामयाबी है। ऐसे में नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को अपने राजनीतिक अनुभव का सहारा लेकर तथा कुशल कार्यशैली को अपनाकर देश के रक्षा-हित में चुनौतियों का सामना करना होगा और कड़े फैसले लेने होंगे।





सरहद की हिफाजत औऱ सैन्य मनोबल की वृद्धि तो सार्वकालिक चुनौती है। पर फिलहाल की चुनौतियां हैं- चीफ ऑफ डिफेंस के पद का गठन, लड़ाकू विमानों की खरीद तथा रक्षा उत्पादन बढ़ाना। हालांकि रक्षा मंत्री के रूप में अरुण जेटली ने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए गठित शेकतकर कमेटी की सिफारिशों को लागू कर बड़े सुधारों को गति दी है पर अब और तेजी से काम करने की विशेष जरूरत है। नई रक्षा मंत्री के खाते में कई ऊंचे अघोषित लक्ष्य भी हैं। जिनमें प्रमुख हैं- भारत-चीन, भारत-पाकिस्तान की तनातनी के बीच सम्मानजनक संतुलन बनाना, सतर्क, चौकस निगाहों से भारत की सुरक्षा तथा सशस्त्र बलों के जवानों की कमी को जल्द से जल्द दूर करना। आज सेना में अफसरों व सैनिकों की कमी है, पर्याप्त गोलाबारूद नहीं है। इन सभी बुनियादी जरूरतों को समझकर नई रक्षामंत्री को सधे कदमों से तेज चलने की जरूरत होगी ताकि सेना पूरी तरह चाक-चौबंद होकर मौजूदा सामरिक परिदृश्य में हर तरह सक्षम हो सके।

नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की भूमिका इस पद के साथ ही और बढ़ गई है क्योंकि अब वह देश के सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) का हिस्सा होंगी। यह कमेटी देश की सुरक्षा से जुड़े अहम फैसले लेती है। उम्मीद की जाती है कि बेबाक, स्पष्ट राय रखने में माहिर, स्पष्ट सोच व शालीन निर्मला सीतारमण नई रक्षा मंत्री के रूप में अपने दायित्व का निर्वहन बखूबी व सटीक करेंगी। नए सामरिक हालात में देश-दुनिया की निगाहें उन पर आ टिकी हैं। भारतीय सैनिक और भारतीय जनता को उनसे बड़ी अपेक्षाएं रहेंगी। महिलाओं को भी।

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