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यह है भारत का सबसे बड़ा किला जानिए 7 खास बातें

भारत में कितनी ही ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हैं अपने भीतर सैकड़ों राज समेटे हुए हैं हम जब भी इन इमारतों में जाते हैं। तो जाने कितने ऐसे राज़ हासिल होते हैं, जो बेहद हैरान करने वाले होते हैं। ऐसा ही एक किला है चित्तौड़गढ़। भारत का यह सबसे बड़ा किला राजपूतों की वीरगाथाओं के लिए अमर है। आइये जानते हैं इस किले से जुड़ी कुछ रोचक बातें :





चार हजार वर्ष पुराना है किले का इतिहास 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण मौर्यवंशीय राजा चित्रांगद ने सातवीं शताब्दी में करवाया था और इसे अपने नाम पर चित्रकूट के रूप में बसाया। बाद में यह चित्तौड़ कहा जाने लगा। किंवदंती है कि प्राचीन गढ़ को महाभारत के भीम ने बनवाया था। भीम के नाम पर भीमगोड़ी, भीमताल आदि कई स्थान आज भी क़िले के भीतर हैं।

मेवाड़ के नरेशों की राजधानी था किला

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मौर्य वंश के राजा मानसिंह ने उदयपुर के महाराजाओं के पूर्वज बप्पा रावल को यह क़िला सौंप दिया। यहीं बप्पा रावल ने मेवाड़ के नरेशों की राजधानी बनाई, जो 16वीं शताब्दी में उदयपुर के बसने तक इसी रूप में रही।

इसी किले में रानी पद्मिनी ने किया था जौहर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1303 ई. में सुलतान अलाउद्दीन ख़िलज़ी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। महारानी ‘पदमिनी’ तथा अन्य वीरांगनाएं अपने कुल के सम्मान तथा भारतीय नारीत्व की लाज रखने के लिए अग्नि में कूदकर भस्म हो गईं और राजपूत वीरों ने युद्ध में प्राण उत्सर्ग कर दिए। जिस स्थान पर रानी पद्मिनी सती हुई थीं वह ‘समाधीश्वर’ नाम से विख्यात है।

तीन बार फतह किया गया था किला

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

चित्तौड़ का दूसरा ‘शाका’ या जौहर गुजरात के सुलतान बहादुरशाह के मेवाड़ पर आक्रमण के समय हुआ। इस अवसर पर महारानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर उसे अपना राखीबंद भाई बनाया था। तीसरा ‘शाका’ अकबर के समय में हुआ, जिसमें वीर जयमल और पत्ता ने मेवाड़ की रक्षा के लिए हंसते-हंसते प्राण दे दिए थे। अकबर के समय में ही महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर नामक नगर को बसाकर मेवाड़ की नई राजधानी वहां बनाई।

122 फुट ऊंचा विजय स्तम्भ

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

महाराणा कुंभा का कीर्तिस्तम्भ, जो उन्होंने गुजरात के सुलतान बहादुरशाह को परास्त करने के उपलक्ष्य में बनवाया था, चित्तौड़ का सर्वप्रथम स्मारक है। 122 फुट ऊंचे इस स्तम्भ के निर्माण में 10 लाख रूपये में हुआ था। यह नौ मंज़िला जिसमें 157 सीढियां बनी हुई हैं।

इस दुर्ग के हैं सात दरवाजे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

चित्तौड़गढ़ के सात दरवाज़े बहुत प्रसिद्ध हैं। इन दरवाज़ों के नाम हैं—पद्मपोल, भैरवपोल, हनुमानपोल, गणेशपोल, जोठलापोल और रामपोल। भैरवपोल के पास जयमल और कल्लू राठौर के स्मारक हैं।

मीराबाई का मंदिर भी है यहां

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

चित्तौड़ के क़िले के अन्दर आठ विशाल सरोवर हैं। प्रसिद्ध भक्त कवयित्री मीराबाई (जन्म 1498 ई.) का भी यहाँ मन्दिर है, जिसे बहादुरशाह ने तोड़ डाला था। वीरांगना पन्ना धाय का महल रानीमहल के निकट ही है।

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