Listicles

‘लिख रहा हूं मैं अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा… मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा,’ शहीद भगतसिंह द्वारा कही गईं 14 बातें

अमर शहीद भगत सिंह ने अपनी कार्यशैली से तो ये जता दिया कि वे महान क्रांतिकारी हैं। पर उनके विचार इस बात की पुष्टि करते हैं इस छोटी सी उम्र में वे एक महान विचारक थे। विचारों की सोच और हँसते-हँसते फांसी के फंदे को गले में लगाना एक अद्भुत मिसाल है। इसी वजह से वह शहीद-ए-आजम भी हैं और एक विचारक भी। आज हम आपको अवगत कराते हैं उनके कुछ ऐसे विचारों से जो आज भी प्रासंगिक है।





‘जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।’

‘मनुष्य तभी कुछ करता है जब उसे अपने कार्य का उचित होना सुनिश्चित होता है, जैसा कि हम विधानसभा में बम गिराते समय थे। जो मनुष्य इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके लाभ के हिसाब के अनुसार इसे अलग-अलग अर्थ और व्याख्या की जाती है।’

‘यदि बहरों को सुनाना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा। जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिये।’

‘राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।’

वर्ष 1927 में पहली बार गिरफ़्तारी के बाद जेल में खींची गई भगत सिंह की फ़ोटो (foto : google)

‘कोई भी व्यक्ति जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार खड़ा हो उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा और चुनौती भी देनी होगी।’

‘किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि विचार बच जाते हैं।’

‘आम तौर पर लोग जैसी चीजें हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है।’

‘इस बात पर जोर देता हूं कि मैं महत्त्वाकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ। पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है।’
‘…व्यक्तियो को कुचल कर, वे विचारों को नहीं मार सकते।’

जालंधर के देशभगत यादगार हॉल में लगाई गई भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की एक पुरानी तस्वीर(फोटो :गूगल)

‘कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक की वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।’

‘हम नौजवानों को बम और पिस्तौल उठाने की सलाह नहीं दे सकते । विद्यार्थियों के लिए और भी महत्त्वपूर्ण काम हैं। राष्ट्रीय इतिहास के नाजुक समय में नौजवानों पर बहुत बड़े दायित्व का भार है और सबसे ज्यादा विद्यार्थी ही तो आजादी की लड़ाई में अगली पांतों में लड़ते हुए शहीद हुए हैं। क्या भारतीय नौजवान इस परीक्षा के समय में वही संजीदा इरादा दिखाने में झिझक दिखाएंगे।’

‘दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उलफत, मेरी मिट्‌टी से भी खुशबू-ए वतन आएगी।’

‘क्रांतिकारी सोच के दो आवश्यक लक्षण है – बेरहम निंदा तथा स्वतंत्र सोच।’

‘मैं महत्वकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूं पर ज़रूरत पड़ने पर मैं ये सब त्याग सकता हूं और वही सच्चा बलिदान है।’

‘लिख रह हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा… मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा।’

Comments

Most Popular

To Top