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निदेशालय के पास महिला कैदियों का कोई हिसाब ही नहीं

उत्तर प्रदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सिस्टम कैसे काम कर रहा है, यह मामला इसकी बानगी भर है। उत्तर प्रदेश के कारागार निदेशालय के पास सूबे के विभिन्न कारागारों में निरुद्ध महिला बंदियों से सम्बंधित कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं है। यानी न तो जेलों से निदेशालय को कोई रिपोर्ट भेजी जाती है और न ही निदेशालय जेलों से कोई रिपोर्ट मांगता है। अगर ऐसा नहीं होता तो आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर को उनका जवाब मिल गया होता। यह तथ्य नूतन ठाकुर द्वारा डीजी, कारागार से मांगी गयी सूचना से सामने आया।





नूतन ने डीजी, कारागार से प्रदेश के विभिन्न कारागारों में निरुद्ध महिला कैदियों की कुल संख्या, उनमें 90 दिन में आरोपपत्र नहीं जमा होने पर भी जमानत नहीं होने वाली, अपराध सिद्ध हो जाने पर मिलने वाली सजा के बराबर सजा पूर्व में ही काट लेने वाली तथा जुर्माने की धनराशि जमा नहीं करा पाने के कारण निरुद्ध महिला कैदियों की संख्या देने का अनुरोध किया था।

इस पर डीआईजी कारागार आर.पी. सिंह ने 03 अप्रैल 2017 के पत्र द्वारा सूचना देने की जगह कहा कि ये सूचनाएं कारागारों से सम्बंधित हैं और वहीं से प्राप्त होंगी। नूतन के अनुसार यह स्थिति वास्तव में भयावह है कि प्रदेश के डीजी कारागार कार्यालय में प्रदेश में निरुद्ध कुल महिला कैदियों की संख्या तक नहीं है, जिससे कारागार विभाग की महिला कैदियों के प्रति असंवेदनशीलता सामने आती है।

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