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दिल्ली के इस पुलिसकर्मी ने जेल में तैयार किए गौरैय्यों के घोंसले

जवान योगेंद्र कुमार

नई दिल्ली। जो गौरैय्या घर-आंगन, छज्जे में अपना घोंसला बना कर  चहचहाया करती थी आज वही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। गौरैया- जी हां, एक वक्त था जब सूर्य की पहली किरण जमीन पर पड़ने से पहले गौरैया की मधुर आवाज से लोगों की नींद खुला जाया करती थी। अब यह धीरे-धीरे विलुप्त होने की तरफ बढ़ रही है। पहले इस पक्षी का ठिकाना घर का रौशनदान हुआ करता था अब उसका नया ठिकाना ‘जेल’ हो गया है।





गौरैय्या का घोंसला

दिल्ली में इसे बचाने की कवायत तो कई लोग कई तरीके से कर रहे हैं लेकिन दिल्ली के मंडोली जेल में भी दिल्ली पुलिस का एक जवान बड़े करीने और खूबसूरती से गौरैय्या को बचाने में मशगूल है। इनके उजड़ते आशियाने को तिहाड़ जेल के हेड वॉर्डर योगेंद्र कुमार का सहारा मिला है। योगेंद्र साल 1996 में जेल वॉर्डर के रूप में भर्ती हुए। योगेंद्र का चिड़ियों से रिश्ता यूं ही नहीं बना, एक घायल चिड़िया ने इनके मन को विचलित कर दिया था। योगेंद्र के मुताबिक घटना साल 2006 की है जब तिहाड़ जेल के सीलिंग फैन से टकराकर एक चिड़िया बुरी तरह घायल हो गई। अफसर ने उस वॉर्डर से कहा कि इसे तुरंत अस्पताल ले जाओ और फिर तभी से योगेंद्र का चिड़ियों से लगाव हो गया। नतीजनतन जेल में गौरैयों के लिए कई घोंसले बनाए ताकि जेल में बेफिक्र दाना चुगे और आजादी से उड़ा सके। योगेंद्र अपनी सैलरी से हर महीने 10 प्रतिशत रकम बेजुबां परिंदों के लिए निकालते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने आज तक किसी से एक रुपये की मदद नहीं मांगी है।

मंडोली जेल परिसर

गौरतलब है कि देश के बहुत से शहरों और राज्यों जैसे- मुंबई, बैंगलुरू, हैदराबाद, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और दूसरे शहरों में गौरैय्या की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। इन राज्यों में गौरैय्या की संख्या काफी कम हो चुकी है। योगेंद्र के बताते हैं कि मंडोली जेल के शुरू होने के बाद साल 2016 में आठ महीने तक उनकी यहां तैनाती रही। तभी एक दिन गौरैया नजर आई। फिर उन्होंने गौरैय्या के लिए दाना-पानी का जुगाड़ किया। दुकानों से पैकिंग वाले खाली गत्ते के डिब्बे इकठ्ठा किए। उन्हें घोंसलों की रूप देकर जेल परिसर के सुरक्षित जगहों पर लगाया। दो चार दिनों बाद ही कुछ गौरैय्या तिनके जोड़-जोड़कर घोंसला बनाने में जुट गईं। आज मंडोली जेल में तकरीबन 70 डिब्बों में गौरैय्यों का आशियाना है।

एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक गौरैय्या की देखभाल व रखरखाव की इस मुहिम में योगेंद्र को जेल प्रशासन और कैदियों का भी साथ मिला। योगेंद्र की इस मुहिम को डिप्टी सुपरिटेंडेंट राजेंद्र कुमार ने काफी सराहा। अब उनकी देखरेख में जेल प्रशासन व कैदी हजारों गौरैय्यों का खूब ख्याल रखते हैं। पिछले साल 20 मार्च को गौरैया दिवस पर मंडोली जेल नंबर- 13 में पहली बार बड़ा इवेंट मनाया गाया। इसी साल 20 मार्च को तिहाड़ जेल के डीआईजी ने सर्कुलर जारी किया। सभी 16 जेलों में गौरैया दिवस मनाया गया। तिहाड़ जेल के डीआईजी एसएस परिहार ने कराया था।

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