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जेलों में सुधार के लिए गृह मंत्रालय ने दिए ये सुझाव

नई दिल्ली: देशभर की जेलों में सुधार के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को कई तरह से काम करने के सुझाव दिए हैं। इनमें विभाग के नाम बदलना, कल्याण शाखा स्थापित करना, जेल मैनुअल 2016 को लागू करना, कैदियों को कोर्ट में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए पेश करना, रिक्त पदों पर भर्तियां करना शामिल है।





गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जेल प्रमुखों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन में मंजूर किए गए प्रस्तावों के बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिवों और गृह सचिवों (कारावास प्रभारी) को पत्र लिखकर जानकारी दी। इस कदम का उद्देश्य कारावास प्रशासनिक प्रणाली को आसान और कारगर बनाना है। गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह दी है कि वह इन सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रयास करें। जेल प्रमुखों का पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में बीते वर्ष 29-30 सितंबर को हुआ था।

इस सम्मेलन में गृह राज्य मंत्री श्री हंसराज गंगाराम अहीर, सीपीओ, एनजीओ आदि से जुड़े 150 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कारावास प्रशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकार किया था।

गृह मंत्रालय ने दिए ये सुझाव

  • कारावास विभाग का नाम बदल कर ‘कारावास एवं सुधारात्मक प्रशासन’ किया जाएगा, जिसके तहत एकीकृत कारावास, सुधारात्मक और परिवीक्षा सेवाएं शामिल हैं।
  • हर राज्य को कारावास विभाग के तहत एक कल्याण शाखा स्थापित करनी होगी, जिसमें कल्याण अधिकारियों, विधि अधिकारियों, काउंसलर और परिवीक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
  • कारावास नियमों और कानूनों में बुनियादी एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने मौजूदा जेल मैनुअल की समीक्षा करें और गृह मंत्रालय द्वारा तैयार तथा मई, 2016 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए आदर्श जेल मैनुअल, 2016 के प्रावधानों को लागू करें।
  • शीघ्र सुनवाई और अदालतों तक विचाराधीन बंदियों को लाने-ले-जाने के खर्च में कमी लाने के लिए सभी जेलों को वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालतों से जोड़ा जाए।
  • कारावास विभागों में रिक्तियां को जल्द भरा जाए।
  • प्राथमिकता के आधार पर जेल ई-प्रणाली को अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणालियों (सीसीटीएनएस) तथा ई-न्यायालयों के साथ एकीकृत किया जाए।
  • समय-समय पर विचाराधीन बंदी प्रबंधन के संबंध में जेल, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और न्यायपालिका का संयुक्त प्रशिक्षण आयोजित किया जाए।
  • कैदियों की आपराधिक प्रवृत्ति और कट्टरता में कमी लाने के लिए अलग से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाए।

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