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एक अनोखा बुक कैफे, जहां जेल के कैदी परोसते हैं पिज्जा!

शिमला: आपने हिंदी फिल्म ‘कर्मा’ और ‘दो आंखें बारह हाथ’ तो देखी ही होगी। दोनों ही फिल्मों में कारावास की सजा पाए कैदियों को जेल में सुधारा जाता है। ठीक इसी तरह का काम अब हिमाचल प्रदेश में किया जा रहा है। दरअसल, शिमला में एक बुक कैफे में कुकीज तथा पिज्जा परोसने के लिए कैदियों को एक नामी होटल ने प्रशिक्षित किया है।





इस कैफे का नाम है ‘बुक कैफे’! यहां लगभग 40 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। कैफे को बनाने में 20 लाख रुपए की लागत आई है। कैफे का उद्घाटन पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने किया। यह रिज के ऊपर स्थित है और प्रसिद्ध जाखू मंदिर के रास्ते में पड़ता है।

महानिदेशक (कारा) सोमेश गोयल ने बताया, “कैफे को चार लोग जयचंद, योगराज, रामलाल तथा राजकुमार संचालित कर रहे हैं। जो शिमला के निकट कायथू जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कैदियों को कैफे में काम में लगाना उनके पुनर्वास का प्रयास है।

कैफे में काम करने वाले कैदी जयचंद ने बताया, “इस कैफे ने हमें दुनिया से जुड़ने का मौका दिया है।” एक अन्य कैदी योगराज ने कहा, “इस कैफे से उन्हें जेल से बाहर आने पर नौकरी करने का मौका मिलेगा। हम चारों कैदियों द्वारा स्वतंत्र रूप से संचालित किया जा रहा है। यहां तक कि आगंतुक तथा स्थानीय लोग हमसे बातचीत करने में कोई शंका महसूस नहीं करते हैं। बल्कि लोग हमारे बदलाव के बारे में जानने को इच्छुक रहते हैं।” शिमला के उपमहापौर तिकेंदर पंवार ने बताया, “कैफे में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय लेखकों की किताबों का अच्छा संग्रह है।”

सबसे बड़ी बात इस कैफे में यह देखने को मिली है कि जो भी टूरिस्ट यहां आते हैं वह भी काफी अच्छा महसूस करते हैं। टूरिस्टों का कहना है कि इस कैफे ने कैदियों को लोगों के साथ रहने का दूसरा मौका दिया है। व्यापक समर्थन के साथ इस तरह के प्रयोगों से उन्हें अपराध की दुनिया से वापस लौटने में मदद मिलेगी।

कैदियों को रात गुजारनी होती है जेल में

यह अपनी तरह का पहला कैफे है, जिसका वित्तपोषण राज्य का पर्यटन विभाग कर रहा है। कैफे सुबस 10 बजे से लेकर रात्रि नौ बजे तक खुला रहता है। रात में कैदी वापस जेल में जाते हैं और रात जेल में ही बिताते हैं।

कैफे में यह भी सुविधा

कैफे में मुफ्त में वाई-फाई की सुविधा मिलती है, जिसका इस्तेमाल इसमें आने वाले लोग कॉफी की चुस्कियों के साथ वन्यजीव, पर्यावरण, पर्यटन तथा शिमला के इतिहास के बारे में जानने के लिए करते हैं। कैफे में चेतन भगत, निकिता सिंह तथा फ्रांस के उपन्यासकार जूल्स वार्न की पुस्तकों के अलावा, शैक्षिक किताबें, पत्रिकाएं व समाचार पत्र मौजूद रहते हैं।

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