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जानिए, गुरुग्राम जेल के कैदियों ने कैसे बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड!

गुरुग्राम: वे न तो इंजीनियर थे और न ही उससे जुड़ी कोई शिक्षा ली थी लेकिन उन्होंने ऐसा काम कर दिखाया जिसे करने में करोड़ों खर्च होते। ये चार शख्स हैं गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद कैदी रोहित पगारे, अनूप सिंह, बलवंत सिंह और अजीत सिंह। हालांकि, इनके मुख्य मार्गदर्शक थे पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमिता मिश्रा लेकिन मिश्रा का साथ ज्यादा दिन तक इन्हें नहीं मिला और उनकी रिहाई हो गई। हालांकि, मिश्रा की रिहाई से पहले सॉफ्टवेयर बन चुका था अब इसे इंप्लीमेंट करना था जो कि सिर्फ पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही कर सकता था खासकर वह जिसने इसे बनाया हो।





कैदी रोहित पगारे, अनूप सिंह, बलवंत सिंह और अजीत सिंह में कोई भी प्रोफेशनल कम्प्यूटर इंजीनियर नहीं है। इन्होंने कम्प्यूटर भी जेल में सीखा और सॉफ्टवेयर भी मिश्रा की अगुवाई में बना डाला। इनके बनाए गए सॉफ्टवेयर के लागू होते ही जेलों में चल रही सभी कैंटीन कैशलेस हो गई हैं। कैंटीन में बॉयोमीट्रिक खाता होने की वजह से वे रोजमर्रा की चीजें कैशलेस खरीद सकते हैं। पहले कैदियो से मिलने के लिए उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना होता था। अब इस सॉफ्टवेयर की मदद से बंदियों तक मैसेज सीधा पहुंचता है। यानि मुलाकात की प्रक्रिया का समय घटकर 45 मिनट से भी कम हो गया है।

पुराने सिस्टम में बंदियों व कैदियों का रिकॉर्ड कागजों में चेक करना होता था। फीनिक्स सॉफ्टवेर लागू होने के बाद सारा रिकॉर्ड कम्प्यूटर पर एक क्लिक में सामने होता है। इन डिटेल्स में कैदी की हिस्ट्री, उसकी कोर्ट की डेट, बीमारी की जानकारी, मुलाकात से जुड़ी जानकारियां आदि रहती हैं।

लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ चारों कैदियों का नाम

भोंडसी जेल के इन कैदियों का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो गया है। हालांकि, सॉफ्टवेयर बनाने के सूत्रधार रहे अमित मिश्रा का नाम इस रिकॉर्ड में नहीं शामिल किया गया है। अमित मिश्रा ने इस सॉफ्टवेयर बनाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया और फिर काम शुरू किया। सॉफ्टवेयर अमित मिश्रा की अगुवाई में बन भी गया था लेकिन फीनिक्स नाम के इस सॉफ्टवेयर को 11 जेलों में लागू करने की जिम्मेदारी गैर इंजीनियर रोहित पगारे (नई दिल्ली), अनूप सिंह, बलवंत सिंह और अजीत (तीनों रेवाड़ी) पर आ गई।

भोंडसी जेल के अधिकारी के अनुसार, राज्यभर के अन्य जेलों में रहकर इन कैदियों ने सॉफ्टवेयर को इंप्लीमेंट किया। माना जा रहा है कि इसे दूसरे जेलों में लागू करने में करोड़ों रुपए खर्च होते लेकिन मिश्रा और इन कैदियों की बदौलत यह काम मुफ्त में हो गया। यह चारों अमित मिश्रा की टीम का हिस्सा थे।

चारों कैदियों की उपलब्धि से गदगद यशपाल सिंघल (डीजीपी, जेल) ने कहा, ‘हरियाणा की जेलें सही मायने में सुधार एवं पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मुझे खुशी है कि भोंडसी जेल प्रशासन के सराहनीय प्रयासों की वजह से जेल और यहां के चार कैदियों का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। सुधार के ये प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।’

भोंडसी जेल के अधीक्षक हरिंदर सिंह ने बताया कि कैदियों ने खुद से ही यह इच्छा जाहिर की कि वह जेलों की कैंटीन, कैदियों के रिकॉर्ड व मुलाकात से जुड़े मामले को कंप्यूटरीकृत करना चाहते हैं। हमने उनका सहयोग किया। हमारे लिए यह गौरव की बात है कि कैदियों की मेहनत की बदौलत न सिर्फ उनका बल्कि जेल का नाम भी लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है।

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