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दिल्ली के तिहाड़ जेल से जुड़े 9 अनजाने फैक्ट्स

“सुबह कभी तो होगी ही इस आस में जीती हूं, चारदीवारी में बैठी बस तेरा नाम लिखती हूं
  इन फासलों में जो गम की जुदाई है, उसी को हर बार लिखती हूं”





जी हां, ये पंक्तियां एक कैदी की जिंदगी को बयान करने के लिए काफी हैं जो एक किलोमीटर लम्बी दीवार पर उकेरी गईं हैं यानीं जब आप इन पंक्तियों को कहीं पर लिखा देखें, तो समझ जाएं कि वह तिहाड़ जेल है। एक ऐसी जेल जिसका नाम सुनते ही अपराधी के पसीने छूट जाते हैं। एक ऐसी जेल जहां जाने से हर कोई डरता है। ऐसी ही जेल है तिहाड़ जेल। आइए जानते हैं दक्षिण एशिया के सबसे लंबे जेल परिसर के बारे में कुछ रोचक जानकारियां :

एशिया का सबसे बड़ा जेल परिसर

 

1958 में बनी दिल्ली की तिहाड़ जेल को देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है। तिहाड़ जेल परिसर दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा जेल परिसर है। दिल्ली सरकार इसे संचालित करती है।

बाद में नाम दिया गया ‘तिहाड़’

1966 में इसकी बागडोर दिल्ली को सौंप दी गई थी। 1984 में इसमें बहुत सी नई सुविधाएं जोड़ी गई और इस पूरे परिसर को तिहाड़ नाम दे दिया गया। आज तिहाड़ को दिल्ली कारागार डिपार्टमेंट संचालित करता है। यह दिल्ली के भीतर दो कारागारों में से एक है। दूसरा जिला कारागार रोहिणी कारागार कॉम्प्लेक्स है जो हरिनगर कहलाता है।

पुरुष जेल की पहली महिला जेलर

इसके अंतर्गत नौ कारागार आते हैं। इनमें से एक महिलाओं के लिए तथा बाकी पुरुषों के लिए हैं। महिला कैदियों के लिए यहां क्रेच की सुविधा भी हैं। जहां उनके बच्चों को लालन-पालन के लिए रखा जाता है। अंजू मंगला को पहली बार तिहाड़ जेल के पुरुष कारागार की जेलर बनाया गया था।

तिहाड़ में मौजूद 14,000 कैदी

तिहाड़ में 6250 कैदियों को रखने की व्यवस्था है। लेकिन वर्तमान में यहां तकरीबन 14,000 कैदी हैं। यहाँ एक आधा खुला जेल भी है जिसमें रहने के लिए कैदी को साबित करना पड़ता है कि वह यहां रहने लायक है। इसके लिए उसे कई टास्क दिए जाते हैं।

<h3इस नाम से बिकते हैं कैदियों के बनाये प्रोडक्ट

 

1961 में जेल में फैक्ट्री शुरू की गई जिसमें कैदियों द्वारा विभिन्न चीजों का निर्माण किया जाता है। TJ’S तिहाड़ जेल में कैदियों द्वारा बनाए गए सामान का ब्रांड नेम है। अचार, बेकरी, हैंडलूम्स, कपड़े, बैग, फर्नीचर, हर्बल, प्रोडक्ट या कैंडल्स आदि इसी नाम से बेचे जाते हैं। दिल्ली में आयोजित कई व्यापार मेलों में ये प्रोडक्ट्स बेचे जाते हैं।

जेल के साथ साथ एक संस्थान भी है तिहाड़

जी हां, तिहाड़ में जहां लोग कैदी के रूप में रहते हैं वहीं उन्हें शिक्षित और जागरूक भी किया जाता है। यही नहीं, उन्हें कानून की शिक्षा भी दी जाती है ताकि उनमें कानून के प्रति सम्मान बढे। यहां कैदियों के स्किल डेवलपमेंट पर भी कार्य किया जाता है ।

किरण बेदी ने बदला तिहाड़ का माहौल

किरण बेदी एक समय में तिहाड़ जेल कैदीगृह की इन्स्पेक्टर जनरल थीं। उन्होंने तिहाड़ के माहौल को बदलने में अहम भूमिका निभाई। किरण बेदी के समय में तिहाड़ जेल को तिहाड़ आश्रम कहा जाने लगा था।

उन्होंने कैदियों के लिए तिहाड़ जेल में कैम्पस प्लेसमेंट योजना चलाई गई थी जिसके तहत कई कैदियों को कोर्पोरेट में नौकरी मिली थी। वर्ष 2014 में यहां 100 फीसदी प्लेसमेंट हुआ था। इनमें एक कैदी को एक कंपनी में 35 हजार रुपये माह की नौकरी मिली थी।

तिहाड़ से भागने में सफल भी रहे कई कैदी

वर्ष 2015 के जून माह में तिहाड़ जेल के दो कैदी फैज़ान व जावेद ने रात को एक दीवार के नीचे से 10 फीट की सुरंग खोद डाली थी ताकि वे वहां से भाग सकें। 19 वर्षीय फैज़ान भागने के दौरान एक सीवर में फंस गया। जहां से उसे पकड़ लिया गया। वहीं, उसका साथी जावेद भागने में सफल रहा इन दोनों को चोरी के जुर्म में कैद में रखा गया था।

एक अन्य कैदी चार्ल्स शोभराज जो एक अंतर्राष्ट्रीय सीरियल किलर था। वह तिहाड़ जेल से 16 मार्च सन् 1986 को भाग निकला था। हालांकि उसे भी जल्द ही दोबारा पकड़ लिया गया।

24 अपराधियों को तिहाड़ में दी गई फांसी

तिहाड़ जेल में अभी तक 24 अपराधियों को फांसी दी गई है। आखिरी बार 9 फरवरी 2013 को अफजल गुरु को फ़ांसी दी गई थी। जेल अधिकारियों के मुताबिक तिहाड़ में इससे पहले फांसी 6 जनवरी 1989 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे केहर सिंह और सतवंत सिंह को फांसी दी गई थी। इससे पहले 11 फरवरी 1984 को मकबूल भट्ट को फांसी दी गई थी।

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