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लॉक-अप खुलते ही यहाँ शुरू हो जाता है योग, प्राणायाम

जबलपुर-सेंट्रल-जेल

जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार में विभिन्न अपराधों की सजा काट रहे कैदी मानसिक तनाव दूर करने, आत्मशांति की प्राप्ति और स्वस्थ रहने के लिए नियमित योग कर रहे हैं। योग, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से बंदियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। ध्यान, योग के सहारे हृदय परिवर्तन कर कैदी जेल से छूटने के बाद संयमित सामाजिक जीवन जीने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।





सुभाष-चंद्र-बोस-केंद्रीय-कारागार

नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार (फाइल फोटो)

जेल में बंद लगभग 2,300 बंदियों में से लगभग एक हजार बंदी नियमित रूप से रोजाना योग करते हैं। बंदियों ने बताया कि योग करने से उनके मन को शांति मिलती है। तनाव दूर होता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। जेल के पश्चिमी एवं पूर्वी खंड में बंद सैकड़ों बंदी रोजाना सुबह बैरक का लॉक-अप खुलने के बाद अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं। ज्यादातर बंदी लॉक-अप खुलते ही योग, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार सहित योग के विभिन्न आसन करते हैं। 30 मिनट से एक घंटा तक योग के विभिन्न आसनों को करने के बाद बंदी अपने दूसरे काम करते हैं।

जेल अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं योग गुरुओं द्वारा समय-समय पर निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता रहता है। इन्हीं प्रशिक्षणों के दौरान वो योग की क्रियाएं एवं योगासन सीख चुके हैं। वहीं, सोमवार से प्रज्ञा साई लोक कल्याण न्यास के तत्वावधान में सुबह आठ बजे से शिविर का आरम्भ किया गया है। शिविर में बंदियों को मानसिक तनाव से मुक्ति पर प्रेरक बातें, ध्यान योग से तनाव मुक्ति का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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