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तिहाड़ में तैयार हो रहा है फांसी-घर, बक्सर जेल में बने 10 फंदे भी पहुंचे

तिहाड़ पुहंचा फांसी का फंदा

नई दिल्ली। बिहार के केंद्रीय कारागार में बने फांसी के 10 फंदे दिल्ली स्थित तिहाड़ में पहुंच चुके हैं। स्थितियों-तैयारियों पर नजर रखने के बाद यह कहा जा सकता है कि यह फंदे निर्भया मामलों के दोषियों के लिए बनाए गए हैं। कहा जा सकता है कि तिहाड़ जेल में बंद निर्भया कांड के दोषियों- विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और मुकेश कुमार को फांसी देने के लिए जेल प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि जेल प्रशासन के पास अभी तक इस बाबत कोई आदेश नहीं आया है।





मीडिया खबरों के मुताबिक जेल सूत्र बताते हैं कि सभी फंदों को लेकर जेल का ही कर्मचारी यहां सोमवार को पहुंचा। कहा जा रहा है कि जरूरत पड़ी तो और भी फंदे बक्सर जेल से मांगाए जा सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक फांसी देने के लिए जल्लाद की तलाश की जा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले 03 जल्लादों से जेल प्रशासन की बातचीत चल रही है। इसमें मेरठ निवासी पवन भी है।

जेल प्रशासन के अफसर बताते हैं कि दोषियों की दया याचिका स्वीकार न हुई तो इन चारों को एक ही दिन फांसी दी जाएगी। तिहाड़ का बीते चार दशक का इतिहास यह बताता है कि यहां कभी एक ही दिन 04 दोषियों को एक ही दिन फांसी के फंदे पर नहीं लटकाया गया।

तमाम चर्चाओं के बीच तिहाड़ जेल संख्या- 3 पर सभी की निगाहें टिकी हुईं है। इसी जेल में फांसी की सजा पाए दोषियों को फंदे पर लटकाया जाता है। इसी जेल में एक खुले हाते में फांसी घर बना हुआ है। आज कल यहां सफाई की तैयारी की जा रही है। सिविल से जुड़े कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है। घास और झाड़ियों को साफ किया जा रहा है। साल 2013 में आतंकी अफजल गुरू को फांसी के बाद से यह फांसी-घर बंद था।

बता दें कि फांसी की सजा पाए कैदियों को सूर्योदय के बाद ही फांसी की सजा देना रिवाज है। गर्मियों में सुबह 06 बजे और सर्दियों में सुबह 07 बजे फांसी की सजा दी जाती है। फांसी पर लाने स पहले दोषी को सुबह 05 बजे नहलाया जाता है। इसके बाद मजिस्ट्रेट दोषी से उसकी अंतिम इच्छा पूछते है।

 

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