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मप्र की 122 जेलों के लिए DGP जेल ने ये क्या कह दिया!

भोपाल/ग्वालियर: ‘सुरक्षा के लिहाज से मध्य प्रदेश की 90 प्रतिशत जेल ठीक नहीं है। इस बात से जेल महकमा भी परेशान है। दरअसल, प्रदेश में कुल 122 जेल हैं। ज्यादातर जेल करीब 80 साल पुरानी हैं। इनमें 90 प्रतिशत जेलों में आर्किट्रेक्चरल सिक्यूरिटी का अभाव है।’ डीजीपी जेल संजय चौधरी ने सोमवार को यह बयान देकर सबको चौंका दिया है। ग्वालियर सेंट्रल जेल का निरीक्षण करने आए डीजीपी जेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस अव्यवस्था को सुधारने की जिम्मेदारी हमारी है। लिहाजा जेलों को सुरक्षित करने के लिए इलेक्ट्रिकल फेंसिंग कराई जा रही है। इसके अलावा जेल प्रहरियों को अलग से ट्रेनिंग भी दी जा रही है। ताकि जेल ब्रेक जैसी घटनाओं को रोका जा सके।





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डीजीपी जेल संजय चौधरी अचानक ग्वालियर की सेंट्रल जेल का निरीक्षण करने पंहुचे। डीजीपी के औचक निरीक्षण से पूरे जेल परिसर में खलबली मच गई। खास बात ये है कि डीजीपी जेल ने स्पष्ट कहा कि मैं अकेले ही निरीक्षण करूंगा। इसके बाद उन्होंने अकेले निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को देखा।

ई-रिक्शा चलाने की योजना

मप्र की जेलों की सुरक्षा में अब ई-रिक्शा को भी शुमार किया जाएगा। जेल की सुरक्षा व्यवस्था, पर्यावरण की रक्षा और कैदियों की सुविधा के लिए प्रदेश की सभी जेलों में ई-रिक्शा चलाने की योजना तैयार की है। इसकी शुरूआत सोमवार को ग्वालियर की सेंट्रल जेल से की गई है।

जेल महकमे के प्रहरियों के नए बैच को टेकनपुर स्थित बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया

जेल ब्रेक और कैदियों के भाग जाने जैसी कई घटनाओं से परेशान जेल महकमा अब अपने प्रहरियों को बीएसएफ से ट्रेनिंग दिलवाकर ऐसी घटनाओं पर ब्रेक लगाएगा। इसके लिए जेल महकमे के प्रहरियों के नए बैच को टेकनपुर स्थित बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया है। यहां जेल प्रहरियों को बीएसएफ के जवानों की तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है। ऐसा पहली बार हो रहा है। अभी तक सिर्फ इन्हें डिपार्टमेंटल ट्रेनिंग ही दी जाती थी।

गौरतलब है कि अक्सर मध्य प्रदेश के जेलों से कैदियों के भागने की खबरें आती रही हैं। सरकार जेल की सुरक्षा को ठीक बताती रही है लेकिन डीजीपी का यह बयान सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

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