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रूस की मिसाइल ने उड़ाए अमेरिका-ब्रिटेन के होश

जिरकोन-मिसाइल

रूस ने मिसाइल की दुनिया में एक क्रांतिकारी आविष्कार किया है। रूस अब ऐसे मिसाइलों का उत्पादन करने जा रहा है, जिसकी मारक क्षमता 7,400 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। ‘जिरकोन’ नाम की ये मिसाइल रणभूमि में दुश्मनों के लिए काल साबित होगी, क्योंकि एक बार इस मिसाइल को दागने के बाद इसके वापस नहीं लाया जा सकता है।





इस मिसाइल की रेंज 400 किलोमीटर है। इस लिहाज से इस मिसाइल को एक बार दागने के बाद इसे वापस लाना असंभव है, क्योंकि अपने लक्ष्य के लिए निकलने के कुछ ही मिनटों में ये मिसाइल अपने टार्गेट को तहस नहस कर देगी। जिरकोन नाम के इस हायपर सोनिक मिसाइल बनाने वाले रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि ये मिसाइल ध्वनि की आवाज से 5 गुना रफ्तार से हमला करेगी।

रूसी रक्षा एजेंसी के मुताबिक 2022 तक रूस इसे अपने बेड़े में शामिल कर सकता है। भारत ने भी स्क्रैमजेट तकनीक आधारित मिसाइल बनाने की शुरुआत कर दी है। भारत भी रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइलों की दूसरी पीढ़ी का संस्करण तैयार कर रहा है।

अमेरिका और ब्रिटेन की बढ़ी चिंता

दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना ताकत रखने वाले अमेरिका और ब्रिटेन इस खबर के सामने आने के बाद चिंता में हैं। रूस के नये मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने इनके आधुनिकतम तकनीक के मिसाइलों को पीछे छोड़ दिया है। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट में छपी खबर के अनुसार ब्रिटेन के रॉयल नेवी का नया एयरक्राफ़्ट करियर भी इस मिसाइल को रोकने में नाकाम साबित होगा, क्योंकि जिरकोन की स्पीड ब्रिटेन के सी केप्टर मिसाइल सिस्टम की क्षमता से अधिक है, वहीं अमेरिका को चिंता है कि रूस इस मिसाइल को परमाणु हमले करने में सक्षम किरोव वारशिप में लगा सकता है।

‘जिरकोन’ कैसे करता है काम

जिरकोन मिसाइल हायपरसोनिक स्पीड को पाने के लिए स्क्रैमजेट तकनीक पर काम करता है, मिसाइल प्रोप्लसन के लिए वायुमंडल के हवा के दबाव का इस्तेमाल करता है, विशेष रूप से बनाया गया एक सिस्टम वायुमंडल से हवा को मिसाइल के ईंधन चेंबर में धकेलता है, यहां हवा विमान के ईंधन से मिलकर शक्तिशाली ऊर्जा पैदा करती है। खास बात ये है कि इस मिसाइल को गति देने के लिए पंखे या टरबाइन का इस्तेमाल नहीं किया गया है, इसका मतलब ये है कि इसमें कम से कम तकनीकी खराबी की आशंका है।

भारत भी इसी संस्करण की तैयारी में

भारत ने भी स्क्रैमजेट तकनीक आधारित मिसाइल बनाने की शुरुआत कर दी है। भारत भी रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइलों की दूसरी पीढ़ी का संस्करण तैयार कर रहा है। इस मिसाइल में भी उसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जो जिरकोन में इस्तेमाल किया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 600 किमी बताई जा रही है और 2020 तक इसे परीक्षण के लिए तैयार कर लिया जाएगा।

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