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‘भारतीय शेर’ की दहाड़ से क्यों परेशान है चीन, ये हैं 11 कारण

भारतीय और चीनी सैनिक

नई दिल्ली। चीनी कहावत है, ‘पहाड़ में एक ही शेर रहेगा।’ पर भारतीय शेर के जागने से यह कहावत अब गलत साबित होती नजर आ रही है। विकास दर के मामले में भारत ने चीन को नंबर दो कर दिया है। और भी कई मोर्चों पर चीन को भारत चुनौती दे रहा है। हताशा में चीन इस कदर परेशान हो गया है कि कभी कुछ तो कभी कुछ कह रहा है। आइए आज जानते हैं चीन की हताशा के 11 कारणः





भारतीय चमक’ से क्यों बेचैन है चीन?

भारत-चीन सीमा

डोकलाम, डोका ला और डोंगयोंग को लेकर भारत और चीन के बीच सीमा विवाद गहरा गया है (फाइल फोटो)

भारत और चीन के बीच डोकलाम में गतिरोध शुरू होने के बाद कोई दिन नहीं जाता, जब चीनी मीडिया भारत पर तंज नहीं मारता हो। कभी कहा जाता है, 1962 को याद करो। कभी कहते हैं पहाड़ साबित होगी चीनी सेना। अपनी महानता का जिक्र करने का कोई भी मौका वहाँ की मीडिया छोड़ नहीं रहा है। यह सच है कि चीन की अर्थ-व्यवस्था अब दुनिया की दूसरे नंबर पर है। पर यह भी सच है कि पिछले दो-तीन साल से उसकी संवृद्धि में गिरावट आई है। दूसरी ओर भारत की अर्थ-व्यवस्था ने गति पकड़ी है।

भारत ने चीन के विकास दर को पछाड़ा

भीरतीय विकास दर

विकास दर में भी भारत से पिछड़ा चीन (फाइल फोटो)

वैश्विक अर्थ-व्यवस्था को लेकर विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल और अगले साल भी भारतीय अर्थ-व्यवस्था चीन से आगे रहेगी। इसके अनुसार चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थ-व्यवस्था 7.2 फीसदी की दर से बढ़ेगी। सन 2018-19 में यह दर बढ़कर 7.7 फीसदी हो जाएगी। दूसरी ओर विश्व बैंक का अनुमान है कि चीन की संवृद्धि इस साल 6.7 फीसदी और 2018 में 6.4 फीसदी होगी।

2025 तक चीन के बराबर होगी भारत की अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था (फाइल फोटो)

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था चीन के बराबर खड़ी हो जाएगी। फिर भी मान लेते हैं कि हमें चीन के बराबर आते-आते करीब बीस साल लगेंगे, पर उसकी शुरुआत हो चुकी है।

भारत में उजाला, चीन में अंधेरा

नासा ने ली भारत की तस्वीर

नासा ने स्पेस से ली भारत की
चमकती तस्वीर (फाइल फोटो)

हाल में कुछ खबरें ऐसी आईं हैं, जो भारतीयों के मन को खुश करेंगी। इनमें एक है अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी अमेरिकी संस्था ‘नासा’ के सिटी लाइट्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट। ‘नासा’ की रिपोर्ट में अंतरिक्ष से भेजी गई एक तस्वीर का हवाला देते हुए कहा गया है कि रात में आसमान से देखें तो भारतीय इलाके में ज्यादा रोशनी नजर आती है। उसके मुकाबले चीनी इलाके अंधेरे में डूबे लगते हैं। इस रिपोर्ट के जवाब में 20 जुलाई को चीन के पीपुल्स डेली ऑनलाइन में शान जिन की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसका शीर्षक है ‘नक्शे में चीन से ज्यादा चमकदार लगता है भारत, पर वह है नहीं।’

भारत को कम साबित करने में लगे हैं चीनी अखबार

चीन के अखबार

चीन के अखबार (फाइल फोटो)

अख़बार ने इसके कई कारण बताए हैं। उसका कहना है कि भारत में मैदानी इलाके 40 फीसदी हैं, जबकि चीन में 12 फीसदी। देश के काफी बड़े इलाके में आबादी कम है। देश की 28 फीसदी आबादी पहाड़ी और पठारी इलाके में रहती है। कम आबादी के देश के उत्तरी और पश्चिमी इलाके अंधेरे में डूबे लगते हैं। अख़बार ने लगे हाथ दावा किया कि चीन में 57 फीसदी शहरीकरण है, जबकि भारत में 35 फीसदी। चीन के हर शहर ज्यादा बड़े हैं।

पुराने आंकड़ों के बल पर चीन कर रहा है कुतर्क

भारतीय-गांव

भारतीय गांवों में बढ़े बिजली से जुड़े काम (फाइल फोटो)

अख़बार की सारी कोशिश यह साबित करने में है कि चीन के मुकाबले भारत काफी पीछे है। इस कोशिश में उसने दावा किया कि भारत के 18,000 से ज्यादा गाँवों के 30 करोड़ से ज्यादा लोगों तक बिजली पहुँची ही नहीं है। यह पुराना डेटा है। भारत सरकार ने 2015 में ऐसे 18,000 गाँवों की पहचान की थी। इनमें से 13,500 गाँवों में इस साल मई तक बिजली पहुँचा दी गई थी। ‘नासा’ ने अपनी रिपोर्ट इस साल अप्रैल में जारी की थी।

भारतीय शेर के जागने से डरता है चीन

भारत-का-उदय

भारत के उदय से उसे अपनी एकछत्र दादागीरी के सामने अड़ंगा लगता दिखाई पड़ रहा है (फाइल फोटो)

चीन अपने आप को एशिया का शेर मानता है। अब भारत के उदय से उसे अपनी एकछत्र दादागीरी के सामने अड़ंगा लगता दिखाई पड़ रहा है। चीनी लोकोक्ति है, ‘पहाड़ में एक ही शेर रहेगा।’ यह लोकोक्ति गलत साबित होती नजर आ रही है। सन् 2013 में जबसे शी चिनफिंग ने सत्ता संभाली है, वे आक्रामक तरीके से चीन को महाशक्ति बनाने के लिए जुट गए हैं। हाल में उन्होंने ‘वन बैल्ट, वन रोड’ की जो अवधारणा पेश की है, वह अपने अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने की कोशिश ही है। भारत ने इस पहल में शामिल होने से न सिर्फ इनकार किया, बल्कि एशियाई-अफ्रीकी गलियारे पर काम शुरू करने की घोषणा की है। इसमें वह जापान की मदद ले रहा है, जो चीन का प्रतिस्पर्धी है।

अंतरिक्ष में भी चीन को चुनौती दे रहा है भारत

भारतीय-सैटेलाइट

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत धीरे-धीरे चीन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है (फाइल फोटो)

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत धीरे-धीरे चीन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। भारत ने जैसे ही एक साथ 108 उपग्रह छोड़े चीन के अख़बार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत को सचेत रहने की नसीहत दे दी। इस साल भारत ने जीएसएलवी की कामयाब उड़ान के बाद अपनी समानव उड़ान का रास्ता भी साफ कर दिया है। ऐसी बातें चीनी मनोदशा पर विपरीत असर डाल रहीं हैं।

ज्यादातर पड़ोसियों से खराब हैं चीन के रिश्ते

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

हालांकि चीन दक्षिण एशिया में पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और बांग्लादेश में पूँजी निवेश करके अपना असर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, पर सच यह है कि उसके अपने पड़ोसियों से रिश्ते खराब हैं।

दक्षिण चीन सागर के तकरीबन 90 फीसदी क्षेत्र को वह अपना विशेष आर्थिक क्षेत्र मानता है। चीन के भूगर्भ संसाधन और खनन मंत्रालय का अनुमान है कि दक्षिण चीन सागर में करीब 17.7 अरब टन क्रूड तेल भंडार है, जो कुवैत के 13 अरब टन के भंडार से ज्यादा है। इस क्षेत्र में वियतनाम ने भारत के ओएनजीसी को तेल खोजने का काम सौंपा है, जो चीन को पसंद नहीं आया है।

सेंकाकू द्वीपों को लेकर चीन-जापान में है तनातनी

साउथ-चाइना-सी

साउथ चाइना सी (फाइल फोटो)

पूर्वी चीन सागर के सेंकाकू द्वीपों को लेकर चीन और जापान के बीच विवाद है। यह विवाद सन 2012 में तब और भड़का जब जापान ने तीन द्वीपों को एक निजी मालिक से खरीदने की पेशकश की। इसके बाद चीन ने इस इलाके में विदेशी विमानों के आगमन पर प्रतिबंध लगा दिए। इस विवाद में अमेरिका भी शामिल हो गया है, क्योंकि उसकी जापान के साथ रक्षा-संधि है।

चीन बनाम फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया..

चीन सेना (फाइल फोटो)

चीनी सेना (फाइल फोटो)

फिलीपींस ने चीन की दक्षिण चीन सागर में दादागीरी को संयुक्त राष्ट्र में चुनौती दी। संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण ने 2016 में फिलीपींस के पक्ष में अपना फैसला सुनाया, जिसे मानने को चीन तैयार नहीं है। सीमा विवाद को लेकर चीन और वियतनाम के बीच 1979 से 1990 तक लगातार संघर्ष होते रहे हैं। स्प्राट्ली और पारासेल द्वीपों को लेकर फिलीपींस और मलेशिया के दावे भी हैं।

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