DEFENCE

अमेरिकी ड्रोन से भारत करेगा चीन की निगरानी

भारतीय ड्रोन

भारत की सुरक्षा प्रणाली में अब एक और हथियार जल्द ही जुड़ने जा रहा है

नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा प्रणाली में अब एक और हथियार जल्द ही जुड़ने जा रहा है, भारत जल्द ही अमेरिका द्वारा दिए गए ड्रोन की सहायता से पडोसी देशों के समुद्री जहाजों पर नजर रख सकेगा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में अमेरिका भारत को निगरानी करने वाली ड्रोन (predator Guardian drones) व तकनीकी सिस्टम देने को तैयार हो गया है। दोनों देशों की तरफ से जारी एक संयुक्त बयान में अमेरिका ने भारत के सामने ये प्रस्ताव रखा।





अमेरिका और भारत एक साथ मिलकर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए एडवांस डिफेंस सिस्टम और तकनीक को मजबूत करने की पहल है। अमेरिका और भारत एडवांस रक्षा उपकरणों और तकनीक के साथ मिलकर अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद कर रहे हैं। व्हाइट हाउस में भारत अमेरिका के दोनों देशों के बीच शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक संयुक्त बयान में ये फैसला लिया गया है।

साझा सुरक्षा हितों को बढ़ावा देगी तकनीक

‘राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधान मंत्री मोदी ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और भी मजबूत करने का वादा किया। वहीँ अमेरिका ने समुद्र निगरानी करने वाले मानव रहित एरियल सिस्टम की बिक्री पर भारत के सामने प्रस्ताव रखा है, जो भारत की क्षमताओं को बढ़ाने और साझा सुरक्षा हितों को बढ़ावा देगा।’ सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2016 में ही पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और मोदी के बीच हुई बैठक में ड्रोन सिस्टम लेने को लेकर सहमति आगे बढ़ी थी, लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इसको लेकर कयास लगाया जाने लगा कि पूर्व प्रशासन के वायदे को पूरा किया जाएगा या नहीं।

22 ड्रोन खरीदेगा भारत

सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में भारत निगरानी करने वाले 22 ड्रोन खरीदेगा और इस पर तीन अरब डॉलर की लागत आएगी।अमेरिका ने ड्रोन की निर्माण तकनीक भी भारत को देने का प्रस्ताव रखा है तो ड्रोन की खरीदारी के बाद यह तकनीकी भारत को हस्तांतरित किये जाने की भी पूरी संभावना है। वैसे भारत अमेरिका से हथियार गिराने वाले या हमला करने वाली ड्रोन तकनीकी को भी लेने को काफी उत्साहित है। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में बात की जाएगी।

इसलिए होगा महत्वपूर्ण

भारत के लिए ड्रोन इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इसकी सहायता से भारत अपनी सामुद्रिक सीमा की निगरानी ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकेगा। देखा जाए तो चीन से अरब की खाड़ी से लेकर बंगाल की खाड़ी तक चीन छोटे-छोटे नौसैनिक अड्डे बना कर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। इसे  देखते हुए इस ड्रोन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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