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पाकिस्तान को सैन्य मदद कर्ज में बदलेगा अमेरिका

डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन। पाकिस्तान से दूरी बनाने की शुरूआत भारत ने की थी, लेकिन अब पाकिस्तान की पुरानी संरक्षक अमेरिका जैसी महाशक्ति ने भी पाकिस्तान से तौबा करना शुरू कर दिया है। ‘अंतर्राष्ट्रीय अरब-अमेरिका इस्लामी सम्मेलन’ में आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रयासों की उपेक्षा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता के लिए दी जाने वाली राशि को कर्ज में परिवर्तित करने का मन बनाया है।





आर्थिक मदद नहीं लोन

डेमोक्रेसी एड पर हो रहे खर्चे पर 29 प्रतिशत कमी लाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने अपने वार्षिक बजट में सैन्य मदद को लोन में बदलने का प्रस्ताव रखा है। विदेशी सैन्य वित्तपोषण के तहत अमेरिकी सैन्य उपकरणों द्वारा कई देशों को ऋण या अनुदान दिया जाता है। पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका है और इससे पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ टूट सकती है।

रक्षा कार्यक्रमों को बजट बढ़ाने का उठाया कदम

द नेशन अखबार के मुताबिक व्हाइट हाउस के बजट दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2018 के वित्त वर्ष के लिए अमेरिका का कुल रक्षा खर्च 603 अरब डॉलर है, जो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2018 के प्रस्तावित बजट से तीन प्रतिशत ज्यादा है। इस 603 अरब डॉलर में ऊर्जा विभाग और अन्य राष्ट्रीय रक्षा कार्यक्रमों के साथ साथ रक्षा विभाग के परमाणु हथियार कार्यक्रमों का खर्च भी शामिल है।

कई देश हो सकते हैं प्रभावित, पाकिस्तान को नहीं मिलेगी मिलिट्री एड

सोमवार को व्हाइट हाउस आॅफ मैनेजमेंट एंड बजट के निदेशक मिक मुलवेनी ने कहा हम दो सैन्य कार्यक्रमों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी अनुदान को ऋण में बदल रहे हैं। किसी को 100 मिलियन डॉलर देने के लिए हम उन्हें एक छोटी गारंटी पर ऋण दे सकते हैं। उनके मुताबिक यह प्रस्ताव पाकिस्तान, ट्यूनिशिया, लेबनान, यूक्रेन, कोलंबिया, फिलीपींस और वियतनाम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका फैसला विदेश मंत्रालय पर छोड़ा गया है। वहीं पाकिस्तान की सैन्य सहायता को काटा जा सकता है।

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