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कश्मीर की पत्थरबाज लड़कियां क्यों बन रहीं सुर्खियाँ ?

पत्थरबाज-कश्मीरी-छात्राएं

इस्लामाबाद। पिछले हफ्ते पाकिस्तानी मीडिया में कश्मीर में हिंसा और पत्थरबाजी करने वाली कश्मीरी लड़कियों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। खासकर उर्दू अखबारों ने इन खबरों को खूब बढ़ा-चढ़ाकर छापा। कॉलेज के सफेद यूनिफॉर्म में लिपटी कश्मीरी लड़कियों की भारतीय सुरक्षाबलों पर पत्थरबाज़ी की तस्वीरें उर्दू अख़बारों में पहले पन्ने पर छापी गईं, जबकि सुरक्षा बलों की फायरिंग में मारे जाने वाले कश्मीरी नौजवानों की पाकिस्तानी झंडे में दफनाने की घटना को भी कुछ अख़बारों ने अपने पहले पन्ने पर जगह दी।





उर्दू अखबार ‘रोज़नामा इस्लाम’ ने अपने एक संपादकीय में पत्थरबाज़ी करने वाली छात्राओं की तस्वीरों को कश्मीर में सोशल मीडिया पर पाबंदी की बड़ी वजह करार दिया। इसी अख़बार में छपने वाले एक और लेख में उन हिस्सों को इस्लाम का दुश्मन और भारत का तरफ़दार करार दिया है जो कश्मीर में जारी हिंसा की ताज़ा लहर को कम कर के दिखा रहे हैं।

कश्मीरी-लड़कियां

कॉलेज यूनिफॉर्म में भारतीय सुरक्षाबलों पर पत्थरबाज़ी करती छात्राएं (फाइल फोटो)

लेख में लिखा गया है, ‘भारतीय कश्मीर में दिनों-दिन बढ़ते प्रदर्शन दुनिया भर में अगर कहीं कम होते या मंद पड़ते दिखाई दे रहे हैं तो समझ लीजिए कि ऐसे लोग या गिरोह या तो इस्लामी दुनिया के खिलाफ अपनी नफरत के अलाव में सुलगते रहते होंगे या फिर भारत के तरफ़दार होंगे।’

अख़बार ‘रोज़नामा उम्मत’ के मुताबिक़, सज्जन जिंदल के दौरे को कश्मीर में आज़ादी के आंदोलन के संदर्भ में देखा जा रहा है, क्योंकि कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पिछले दिनों मोदी से मुलाकात की थी और कहा था कि कश्मीर में हालात गंभीर हो गए हैं, इसलिए इस मसले के हल के लिए हुर्रियत नेताओं और पाकिस्तान से बात की जाए।

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