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स्पेशल रिपोर्ट: भारत में उत्तर कोरिया के राजदूत पांच महीने से क्यों नहीं लौटे ?

Kye Chun Yong

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच वार्ता में अहम भूमिका निभाने वाले भारत में उत्तर कोरिया के राजदूत क्ये चुन योंग( Kye Chun Yong)  पिछले मार्च में राजधानी प्योंगयांग गए थे और तब से भारत अपनी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं। उत्तर कोरिया ने भारत में अपने राजदूत को बदलने का कोई ऐलान नहीं किया है और यहां विदेश मंत्रालय के प्रोटोकाल डिवीजन के वेब लिंक पर भी क्ये चुन योंग का ही नाम राजदूत के तौर पर चल रहा है।





राजदूत योंग के पांच महीने से अधिक वक्त तक भारत नहीं लौटने से यहां राजनयिक हलकों में कई तरह की अटकलें और शंकाएं जाहिर की जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि राजदूत योंग उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के खास पसंद वाले और अत्यधिक विश्वासी राजनयिक के तौर पर जाने जाते थे इसीलिये उन्हें उत्तर कोरिया और अमेरिका के आला अधिकारियों के बीच वार्ता के कुछ दौर नई दिल्ली में आयोजित करवाने के लिये कहा गया था।

उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत की सम्भावना को लेकर नई दिल्ली में ही बैठकों का सिलसिला 2015 से ही शुरु हो गया था और उत्तर कोरिया ने नई दिल्ली स्थित अपने राजदूत को इसलिये चुना कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी भनक नहीं लगे। उत्तर कोरिया और भारत के बीच राजनयिक रिश्ते सामान्य हैं और बहुत प्रगाढ़ नहीं कहे जा सकते। भारत ने उत्तर कोरिया को खाद्य सामग्री भेजकर उत्तर कोरिया को महत्वपूर्ण खाद्य मदद पहुंचाई है। लेकिन उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और चीन के मिसाइल और परमाणु तकनीक मदद में चल रही त्रिकोणीय सांठगांठ को लेकर भारत ने हमेशा चिंता जाहिर की है।

यहां विश्वस्त राजनयिक सूत्रों ने बताया कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत के लिये आए दोनों देशों के शिष्टमंडलों के बीच बैठकें गुड़गांव के होटल और फिर ग्रेटर नोएडा के होटल में चली थी। बाद में यह बातचीत मलयेशिया शिफ्ट हो गई। मलयेशिया में किम जोंग उन के सौतेले भाई किम जोंग -नाम की कुआलालम्पुर हवाई अड्डे पर पिछले साल के शुरू में रासायनिक गैस से हुई मौत के बाद यह बातचीत वहां रोक दी गई। शंका है कि इस मौत के पीछे भी उत्तर कोरियाई नेता का ही हाथ था।

अपने राजदूत से किम जोंग उन कहीं नाराज तो नहीं हो गए?

सूत्रों ने शंका जाहिर की है कि उत्तर कोरियाई राजदूत क्ये चुन योंग से उत्तर कोरियाई नेता किम इसलिये नाराज हो गए होंगे कि उन्होंने दक्षिण कोरिया से चल रही बातचीत की कुछ जानकारी यहां भारतीय राजनयिकों को दे दी थी। उत्तर कोरियाई नेता राजकीय गोपनीयता तोड़ने वाले को नहीं बख्शते हैं।

उत्तर कोरियाई राजदूत अपने नेता किम जोंग उन के इतने भरोसेंमंद थे कि उन्हें यहां एक टीवी चैनल  वियोन को पिछले साल 21 जून को इंटरव्यू देकर यह बोलने की इजाजत मिली कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल भंडार पर रोक लगाने के लिये अमेरिका से बातचीत को तैयार है। उत्तर कोरियाई नेता का कोई खास प्रतिनिधि ही इस तरह की पेशकश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रख सकता है। उत्तर कोरियाई राजदूत उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री री योंग हो के नजदीकी रिश्तेदार भी बताए जाते हैं।

राजदूत योंग ने कहा था कि कुछ खास शर्तों के साथ उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल भंडार पर रोक लगाने को तैयार होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि हमारी मांगें मानी जाती हैं तो हम परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के बारे में सौदेबाजी कर सकते हैं।

राजदूत ने अपने देश या नेता की ओऱ से यह भी पेशकश की थी कि उत्तर कोरिया यह चाहेगा कि अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ अपने सैनिक अभ्यासों को पूरी तरह रोक दे। गौरतलब है कि अमेरिका के 28 हजार से अधिक सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं। उत्तर कोरिया को डराने के लिये अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ नियमित तौर पर साझा सैन्य अभ्यास करता है।

सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ने उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बैठकों का सिलसिला चलाने के लिये जो सुविधा प्रदान की उससे भारत और उत्तर कोरिया के बीच रिश्तों में भरोसा पैदा हुआ। इसी वजह से विदेश राज्य मंत्री  वीके सिंह को गत मई माह के मध्य में उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग का दौरा करने के लिये आमंत्रित किया।

इस दौरान विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह की उत्तर कोरिया के उपराष्ट्रपति के अलावा विदेश मंत्री सहित कई-बडे नेताओं से मुलाकात हुई थी। भारत से उत्तर कोरिया के लिये गत 20 सालों में यह पहला उच्चस्तरीय सरकारी दौरा था। तब भारतीय विदेश मंत्रालय ने उत्तर औऱ दक्षिण कोरिया के बीच चल रही बातचीत को समर्थन प्रदान किया था।

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