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स्पेशल रिपोर्ट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का कश्मीर पर बयान गलत- भारत

इमरान खान और डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से आग्रह किया  था कि वह जम्मू कश्मीर मसले पर बीचबचाव करें।





वाशिंगटन में  पाकिस्तान के  प्रधानमंत्री इमरान खान से ह्वाइट हाउस में हुई दिवपक्षीय बातचीत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों मे कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे जम्मू कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने का आग्रह किया था।  सोमवार रात को इस आशय का बयान जारी होने के बाद  इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया पर  जोरदार बहस और टिप्पणीबाजी होने लगी। भारत के विपक्षी राजनीतिक नेताओं ने ट्रम्प की टिप्पणी को संज्ञान लेते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं जारी करनी शुरु कर दी।  कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा और कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव डी राजा ने मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी सदन में अपना बयान जारी करें।

देर रात विदेश मंत्रालय क प्रवक्ता  ने एक बयान जारी कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान से किनारा कर लिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प से आग्रह किया था कि वह जम्मू-कश्मीर विवाद में बीचबचाव करें। बाद में जम्मू-कश्मीर मसले  पर  भारत का रुख साफ करने के लिये विदेश मंत्री  एस जयशंकर ने  मंगलवार को संसद में बयान देते हुए कहा कि वह यह साफ  करना चाहेंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई आग्रह नहीं किया गया है। बाद में अमेरिकी ह्वाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान  की एक लिखित कापी जारी की जिसमें जम्मू-कश्मीर मसले का कोई जिक्र नहीं किया गया।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति इमरान खान ने  22 जुलाई की सुबह वाशिंगटन  में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से दिवपक्षीय बैठक की थी। इसके बाद  राष्ट्रपति ट्रम्प ने  इमरान खान ने एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस  के बाद यह बात कही। लेकिन जयशंकर ने संसद में अपना बयान पढ़ते हुए काह कि भारत की यह लगातार नीति रही है कि फाकिस्तान के साथ सभी विवादों का हल शांति से निकाला जाए।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ दिवपक्षीय बातचीत से ही मसलों का हल  निकलेगा।

जयशंकर ने कहा कि वह यह बात साफ तौर पर कहना चाहेंगे कि  डोनाल्ड ट्रम्प से भारत ने इस तरह कोई पेशकश नहीं की है।  इसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि खंडन का एक कमजोर बयान काफी नहीं है। सरकार को साफ बताना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच क्या क्या बातचीत हुई।

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