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स्पेशल रिपोर्ट: तालिबान से अमेरिकी वार्ता- भारत को भरोसे में लेने की कोशिश

अमेरिका और तलिबान के बीच वार्ता
फाइल फोटो

नई दिल्ली। हाल तक तालिबान को आतंकवादी मानने वाला अमेरिका अब तालिबान के साथ शांति वार्ता को लेकर वह  भारत को भरोसे में लेने की कोशिश कर रहा है। तालिबान के साथ अब तक चली शांति वार्ता के बारे में यहां अफगानिस्तान  मसले पर अमेरिकी विशेष दूत जालमे खालिलजाद ने भारत के आला नेतृत्व को पूरी जानकारी दी है औऱ अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में गहन चर्चा की है।





समझा जाता है कि तालिबान के साथ चल रही शांति वार्ता को भारत ने समर्थन प्रदान किया है लेकिन अमेरिका को आगाह किया है कि तालिबान के असली इरादों के प्रति सावधान रहे।  जालमे खालिलजाद ने यहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज , राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल  और विदेश सचिव विजय गोखले के साथ अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार के भविष्य और तालिबान के साथ चल रही शांति वार्ता पर गहन बातचीत की। गौरतलब है कि यह वही तालिबान है जिसके खिलाफ अमेरिका ने 2001 में अपनी फौज तैनात की थी और उसे नेस्तनाबूद करने के लिये खुला युद्ध छेड़ा था लेकिन अमेरिका ने अपना पैंतरा बदल लिया है और अफगानिस्तान से जल्द से जल्द बाहर निकलने को आतुर है। इसी इरादे से अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि पाकिस्तान के सहयोग से तालिबान के साथ सुलह वार्ता को कामयाब बनाया जाए।

यहां जालमे खालिलजाद की भारतीय नेताओं के साथ हुई वार्ता को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कोई आधिकारिक तौर पर मौन बरता हुआ है जब कि अमेरिकी दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा है कि  अफगान शांति वार्ता के लिये भारत से मिले समर्थन का जालमे खालिलजाद ने स्वागत किया । इससे शांति वार्ता को लेकर विकसित की जा रही अंतरराष्ट्रीय आम राय को मजबूती मिलेगी। खालिलजाद ने अफगानिस्तान के विकास में भारत के योगदान की भी सराहना की।

अमेरिकी बयान के मुताबिक शांति वार्ता के कामयाब होने से कई लाभ मिलेंगे जिसमें अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमले के लिये मंच के तौर पर इस्तेमाल रोकना शामिल है।  शांति वार्ता के कामयाब होने से क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और इससे क्षेत्रीय सम्पर्क मार्ग औऱ व्यापार को नये अवसर मिलेंगे।

अमेरिकी बयान के मुताबिक  विशेष दूत खालिलजाद ने भारतीय नेताओं के साथ अफगानिस्तान के भविष्य के बारे में भी चर्चा की। अफगानिस्तान का भविष्य अफगानी लोग ही तय करेंगे। अमेरिकी दूत और भारतीय अधिकारियों के बीच यह सहमति भी बनी कि पिछले 18 सालों में अफगानिस्तान में जो उपलब्धियां हासिल  हुई हैं उन्हें बरकरार रखना होगा। राजदूत खालिलजाद ने भारतीय अधिकारियों को यह भरोसा भी दिया है कि तालिबान के साथ बातचीत में प्रगति के बारे में भारत को जानकारी देते रहेंगे।

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