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स्पेशल रिपोर्टः आसिया बीबी की रिहाई के बाद पाक में अशांति, इमरान के सामने कठिन चुनौती

इमरान खान और आसिया बीबी
इमरान खान और आसिया बीबी

नई दिल्ली। पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा का सामना कर रही इसाई महिला आसिया बीबी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किये जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सामने नई घरेलू सुरक्षा और राजनीतिक चुनौती पैदा हो गई है जिससे निबटना उनके लिये काफी मुश्किल होगा। इस्लामी धर्म ग्रंथ कुरान की कथित निंदा के आरोप में आसिया बीबी को 2009 में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।





गौरतलब है कि बुधवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाने के बाद पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। इस घरेलू माहौल के बावजूद प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के अपने पहले सरकारी दौरे पर रवाना हो गए हैं।

आसिया बीबी के खिलाफ फैसले को लागू करने के लिये सरकारी फैसले के बाद कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों ने तीन हस्तियों प्रधानमंत्री इमरान खान,  सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार के खिलाफ मौत का फतवा जारी किया है। इस फतवे को गम्भीरता से लेते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने देश भर में नाकेबंदी कर दी है और कर्फ्यु जैसा माहौल है। बड़े शहरों में यातायात रुका हुआ है और सरकारी भवनों के सामने तालिबानी ताकतें डेरा जमाए हैं।

चीफ जस्टिस सहित तीन जजों ने अपने फैसले में कहा है कि आसिया बीबी की अपील मान ली गई है। इसके पहले ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वरा सुनाई गई मौत की सजा को बहाल कर उसे रिहा किया जाता है। जेहादियों की बैसाखी पर प्रधानमंत्री का चुनाव जीतने वाले इमरान खान ने हालांकि कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू किया जाएगा लेकिन जानकारों का कहना है कि जिस तरह पाकिस्तान में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और हिंसा की धमकियां दी जा रही हैं उससे आने वाले दिनों में पाकिस्तान का घरेलू माहौल काफी उथल-पुथल भरा होगा।

ईश निंदा के आरोप में मौत की सजा पाने वाली आसिया बीबी अकेली नहीं है। कई अन्य भी ईश निंदा के आरोप में जेल में कैद हैं। उनमें एक प्रमुख नाम है मुलतान के कालेज के लेक्चरर जुनैद हाफीज जो दो साल से जेल में कैद हैं। आसिया बीबी को रिहा करने के फैसले के बाद अन्य आरोपियों को भी रिहा करने का दबाव सुप्रीम कोर्ट पर पड़ेगा जिससे पाकिस्तान की न्यायपालिका और राजनीति को भारी बवंडर का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेक्षकों को हैरानी इस बात पर भी हो रही है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा के खिलाफ भी मौत का फतवा जारी किया गया है। पाकिस्तानी सेना खुद इन जेहादी ताकतों को पालती-पोसती रही है इसलिये अब पाकिस्तान की कट्टरपंथी ताकतों द्वारा पाकिस्तानी सेना से ही टकराने का ऐलान कर देने के बाद पाकिस्तानी सेना को जेहादी संगठनों के खिलाफ अभियान चलाना होगा। इससे पाक सेना और जेहादी संगठनों के बीच टकराव बढ़ेगा और आतंकियों का राजनीतिक इस्तेमाल करने की पाक सेना की रणनीति को भारी धक्का पहुंचेगा।

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