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स्पेशल रिपोर्ट: भारत और सऊदी अरब के बीच अब रक्षा रिश्ते भी

पीएम मोदी और सऊदी राजकुमार सलमान

नई दिल्ली। सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान भारत के दो दिनों के पहले राजकीय दौरे पर यहां 19 फरवरी की शाम को पहुंचे और भारत के साथ पहले से तय सामरिक साझेदारी के रिश्तों को और मजबूत बनाने का संकल्प जाहिर किया। 20 फरवरी को उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ आपसी, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर गहन बातचीत होगी। इसके बाद एक साझा बयान जारी होगा जिसमें आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दोनों देशों द्वारा दिखाने की उम्मीद है।





सऊदी राजकुमार के भारत दौरे की एक खास विशेषता यह है कि  इस दौरान दोनों देश आपसी रिश्तों को सामरिक आयाम देने के लिये रक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग औऱ साझेदारी के रिश्तों की नींव रखेंगे। दोनों देशों के बीच रिश्तों के इस नये पहलू के बारे में यहां एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि दोनों देशों की रक्षा कम्पनियों के बीच सैनिक साज-सामान और हथियारों के उत्पादन के लिये संयुक्त उद्यमों की स्थापना पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है। सऊदी कम्पनियां अपने देश की सैन्य जरुरतों को पूरा करने के लिये भारत को अपना रक्षा उत्पादन आधार बनाने पर विचार कर रही हैं। इन संयुक्त उद्यमों में उत्पादित सैनिक साज सामान की सप्लाई भारतीय सेनाओं को भी की जाएगी।

साझा रक्षा उत्पादन के अलावा दोनों देशों की सेनाओं के बीच भी आपसी आदान प्रदान और तालमेल का रिश्ता स्थापित करने के लिये बातचीत चल रही है। यहां विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच साझा नौसैनिक अभ्यास का कार्यक्रम तय हो जाएगा।

पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के घनिष्ठ सम्बन्धों के मद्देनजर  भारत के साथ सऊदी अरब के रिस्तों में इन नये आयामों को सामरिक हलकों में काफी उत्सुकता से देखा जा रहा है। सऊदी अरब अब तक विभिन्न मंचों पर जम्मू-कश्मीर मसले पर भारत को चुभने वाला रुख अपनाता रहा है लेकिन रोचक बात यह है कि पहली बार सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान के पाकिस्तान दौरे के बाद जो साझा बयान जारी किया गया उसमें जम्मू-कश्मीर का नाम तक नहीं लिया गया।

हालांकि पाकिस्तान की जिद पर सऊदी अरब ने जरूर यह बात साझा तौर पर कही कि संयुक्त राष्ट्र के जरिये किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करवाने के मसले का राजनीतिकरण नहीं करे। भारत को इस बात से परेशानी हो सकती है लेकिन यहां भारतीय राजनयिक हलकों को इस बात से संतोष है कि साझा बयान में जम्मू-कश्मीर का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

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