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Special Report: फारस की खाड़ी में युद्ध के हालात भारत के लिए भारी चिंता

राष्ट्रपति ट्रंप और रोहानी

नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी समुद्री  इलाके में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के हालात जानबूझकर उकसाए जा रहे हैं। फारस की खाड़ी में विकसित हो रहे सैन्य तनाव के बीच भारत ने उस इलाके में अपने युद्धपोत भेजकर अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने का ऐलान किया है लेकिन ऐसा लगता है कि फारस की खाड़ी में अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई का बहाना खोज रहा है। फारस की खाड़ी का इलाका जब युद्धक्षेत्र में तब्दील हो जाएगा तो भारतीय नौसेना को वहां से अपने पोत हटाने होंगे।





दो दिनों पहले ईरान ने अमेरिकी नौसेना के ग्लोबल हॉक ड्रोन विमान को अपनी विमान भेदी मिसाइल से मार गिराया था जिससे तिलमिलाये अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हमले की योजना बनाई लेकिन इसे  अंतिम  क्षणों में वापस ले लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बारे में कहा कि हमले के आदेश को लागू करने के ठीक दस मिनट पहले ही उन्होंने आदेश वापस ले लिया क्योंकि इससे भारी संख्या में ईरानियों की मौत हो जाती।

अमेरिकी ग्लोबल हॉक ड्रोन गिराए जाने के बाद ईरान ने इसे स्वीकार करते हुए कहा था कि अमेरिकी ड्रोन ईरान के समुद्री इलाके के ऊपर उड़ान भर रहा था। लेकिन अमेरिका ने इसे गलत बताते  हुए कहा कि अमेरिकी ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके के ऊपर टोही कार्य कर रहा था।

हालांकि अमेरिका ने ईरान पर हमला करने का आदेश अंतिम क्षणों में वापस ले लिया लेकिन खाड़ी के इलाके में युद्ध का खतरा बना हुआ है। ये हालात भारत और अन्य बाकी देशों के लिये भारी चिंता की बात है। खाड़ी के इलाके में यदि ईरान और अमेरिकी सेनाओं के बीच युद्ध छिड़ा तो ईरान का नभक्षेत्र यात्री विमानों की उड़ान के लिये बंद कर दिया जाएगा। इससे भारतीय विमानन को भारी ठेस पहुंचेगी। भारतीय यात्री विमानों को पहले ही पाकिस्तान के नभक्षेत्र से हो कर उड़ने नहीं दिया जा रहा है और यदि ईरान का भी नभक्षेत्र बंद हो गया तो भारतीय यात्री विमानों को भारी चक्कर काट कर यूरोपीय देशों तक पहुंचना होगा। इससे  भारतीय विमानन को भारी परेशानी उठानी होगी।

इसके अलावा फारस की खाड़ी से ही होकर भारत को खनिज तेल की सप्लाई होती है। यदि फारस की खाड़ी का इलाका बंद हो गया तो भारत को सऊदी अरब और दूसरे अन्य अरब मुल्कों से पेट्रोल की सप्लाई में भारी बाधा पहुंचेगी। इस वजह से भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।

गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पहले ही आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका ने कहा है कि ईरान को अपना परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रोकना होगा। लेकिन ईरान का कहना है कि 2015 में ईरान और अमेरिका सहित जिन छह देशों के बीच परमाणु समझौता हुआ था ईऱान उनका पूरी ईमानदारी से पालन कर रहा है। पर अमेरिका द्वारा इस संधि से अलग होने औऱ ईरान को एकतरफा धमकियां देने के बाद ईरान ने भी कह दिया है कि वह परमाणु समझौते को नहीं मानेगा और यूरेनियम का संवर्द्धन और ऊंचे स्तर का करेगा।

अमेरिका पर आरोप है कि वह किसी भी तरह ईरान को युद्ध में उलझा कर वहां सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रहा है।

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