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स्पेशल रिपोर्ट: विशेषज्ञों की राय में श्रीलंका के हमलों का असली निशाना पश्चिमी देश

श्रीलंका में आतंकी हमला

नई दिल्ली। श्रीलंका में गत 21 अप्रैल को हुए भीषण आतंकवादी हमले का असली  निशाना पश्चिमी देश थे न कि कोलम्बो के चर्च औऱ होटल। आतंकवादी इस हमले को इस्तेमाल अपने प्रोपेगंडा के लिये करना चाहते थे।





यहां रूसी दूतावास के सूचना विभाग और स्पुतनिक न्यूज द्वारा आयोजित भारत रूस वीडियो वार्ता में विशेषज्ञों ने उक्त टिप्पणी की। विशेषज्ञों ने कहा कि श्रीलंका के  आतंकवादियों ने  चर्च और पांचसितारा होटलों को  इसलिये निशाना बनाया कि वे पश्चिमी देशों तक यह संदेश देना चाहते थे कि इस्लामिक स्टेट अभी खत्म नहीं हुआ है। इस्लामिक स्टेट का भले ही किसी एक भौगोलिक इलाका से सफाया हो गया हो लेकिन एक विचारधारा के तौर पर वह जिंदा है।

इस वीडियो वार्ता में भारत की ओर से  एम्बेसडर के पी फाबियन, आतंकवाद मामलों के विशेषज्ञ अजय साहनी, मेजर जनरल (रिटायर) ध्रुव कटोच  और रूस की ओर से यूरी नागरन्याक , प्रोफेसर बोरिस वोलहोंस्की और प्रोफेसर अलेक्जी कुप्रियानोव ने भाग लिया।

गौरतलब है कि 21 अप्रैल को ईस्टर संडे के मौके पर श्रीलंका के आतंकवादी गुट ने कई बम धमाके किये थे जिनसे पौने तीन सौ लोग  मारे गए और पांच सौ लोग घायल हो गये थे। इन हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। इस्लामी स्टेट ने इस हमले के लिये श्रीलंका के आतंकवादी गुट तौहीद जमात को उकसाया।

मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि इस्लामिक स्टेट को हराया नहीं जा सका है.। इस्लामी स्टेट ने एक प्रादेशिक इलाका खोया है लेकिन अपनी विचारधारा नहीं। यह लड़ाई वैचारिक है। वे चाहते हैं कि पूरी दुनिया एक खलीफा के तहत शासित हो। वे इस्लाम और ईसाई धर्म के बीच धार्मिक टकराव का माहौल बनाना चाहते हैं।

रूसी विशेषज्ञ यूरी नार्गन्याक ने कहा कि यह हमला प्रोपेगंडा  का असर बनाने के इरादे से किया गया। यह हैरान करने वाली बात है कि  आत्मघाती हमला करने वाले अमीर परिवारों के युवक थे जबकि इराक और सीरिया में अधिकतर गरीब युवक  इस आतंकवादी गुट में शामिल होते रहे हैं। लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिये कि अल कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन भी एक अमीर  परिवार का ही था।

आतंकवादी मामलों के विशेषज्ञ अजय साहनी  के मुताबिक श्रीलंकाई अधिकारियों को  हमले की तैयारी के बारे में खुफिया जानकारी एक सप्ताह पहले ही दे दी गई थी।   लेकिन श्रीलंकाई अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इससे राज्य की अक्षमता का पता चलता है। यह भी एक सचाई है कि तौहीद जमात के बारे में  अधिक पता नहीं था। इस गुट के बारे  में देश के बाहर भी किसी को पता नहीं था।  वास्तव में इन हमलों से  राज्य के सुरक्षा  तंत्र की पूरी विफलता का पता चलता है।

पूर्व राजदूत के पी फाबियन ने कहा कि इस हमले की कामयाबी से श्रीलंका के राजनीतिक नेतृत्व में गम्भीर मतभेद का भी पता चलता है। रूसी विशेषज्ञ अलेक्सी कुप्रियानोव ने कहा कि   भारत को अपने इलाके मं एक सुरक्षा प्रदाता के तौर पर जाना जाता है इसलिये वह इस तरह के खतरों के प्रति सचेत रहेगा।

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