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स्पेशल रिपोर्ट: इमरान की कथनी और करनी में फर्क, संघर्षविराम का रिकार्ड उल्लंघन

पाक पीएम इमरान खान

नई दिल्ली: सत्ता सम्भालने के बाद से ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के साथ शांति और दोस्ती के रिश्तों की बातें कर रहे हैं लेकिन उनकी कथनी और करनी में भारी फर्क साफ दिख रहा है।





जम्मू कश्मीर में जिस तरह से शांति को भंग करने के कदम पाकिस्तानी सेना ने  निरंतर उठाए हैं उससे यह साफ उजागर होता है कि प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर वहीद बाजवा एक ही  नजरिया नहीं रखते हैं। जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा औऱ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जिस तरह से 2003 के  संघर्षविराम समझौते की भावना का हनन किया जा रहा है उससे यह साफ है कि पाकिस्तान आतंक की  नीति जारी रखे हुए है।

नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ताजा आंकडें यही दर्शाते हैं कि इस साल छह जून तक यानी इस साल के  करीब पांच माह में ही पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम उल्लंघन  की रिकार्डतोड़  1170 वारदातें हुईं हैं जब कि पिछले पूरे साल ( 2018) में संघर्षविराम की 1629 वारदातें  हुई । 2017 के दौरान यह आंकड़ा 860 का था जब कि 2016 में संघर्षविराम की 228 वारदातें ही हुईं। साफ है कि 2016 के बाद से पाकिस्तान का रवैया अधिक से अधिक आक्रामक होता गया है।

नियंत्रण  रेखा औऱ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्षविराम के उल्लंघन की  बढ़ती वारदातें यह बताती हैं कि पाकिस्तान  भारतीय जम्मू कश्मीर के इलाके में आतंक का माहौल बनाए रखने के लिये नियंत्रण  रेखा को हमेशा  गर्म रखना चाहता है और इस इलाके में गोलीबारी कर वह अपने आतंकवी गिरोहों को भारतीय इलाके में घुसाने की कोशिश करता है।

यही वजह है कि  इस साल सात जून तक यानी पहले पांच महीनों में में कुल 103 आतंकवादी  मारे गए जबकि  पिछले साल 254 आतंकवादी मारे गए थे और 2017 में 213 आतंकवादी मारे गए। 2016 में 141 आतंकवादियों के  मारे जाने की जानकारी सैन्य सूत्रों ने यहां दी।

उक्त अवधि के दौरान ही भारतीय सेना के 16 जवान शहीद हुए ( सात जून तक ) जब कि 2018 में 61 , 2017 में 59 और 2016 में 63 भारतीय सैनिक शहीद हुए।

यहां राजनयिक सूत्रों के मुताबिक यही वजह है कि भारत पाकिस्तान से कह रहा है कि भारत के साथ शांति से रहने की अपनी बातों का भरोसा जब तक पैदा नहीं होगा तबतक पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया दोबारा बहाल नहीं हो सकती। भारत ने साफ कहा है कि आतंक और वार्ता साथ साथ नहीं चल सकती। यही वजह है कि  14 जून को होने वाली शांघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ कोई औपचारिक दिवपक्षीय बातचीत नहीं करने का फैसला किया है।

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