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Special Report: ताइवान ने इंटरपोल में शामिल होने के लिये भारत से मांगी मदद

इंटरपोल
फाइल फोटो

नई दिल्ली। चीन से अलग होकर अपना शासन खुद सम्भालने वाले ताइवान ने भारत से आग्रह किया है कि इंटरपोल (अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन) की बैठकों में भी ताइवान को आमंत्रित करने के लिये इंटरपोल पर दबाव बनाए। चीन के विरोध की वजह से ताइवान को इंटरपोल की सदस्यता नहीं मिल रही है।





गौरतलब है कि साल 1949 में नव चीन की स्थापना के बाद ताइवान द्वीप ने अपने यहां रिपब्लिक आफ चाइना की स्थापना की थी और वह चीन से अलग खुद को एक राष्ट्र के तौर पर घोषित करना चाहता है लेकिन चीन ताइवान को धमकी देता है कि ऐसा करने पर वह ताइवान पर सैनिक हमला कर देगा। चीन की इन धमकियों के मद्देनजर ताइवान ने हाल में ही अमेरिका से एफ-16 लड़ाकू विमानों का नया स्क्वाड्रन हासिल किया है।

यहां ताइवान के कार्यालय ताइपेई इकोनामिक एंड कल्चरल  सेंटर (टीईसीसी)  ने  एक  बयान जारी कर कहा है कि इंटरपोल की बैठकों में ताइवान को भी भाग लेने देने के लिये अपना समर्थन दे। ताइवान ने कहा कि ताइवान उस भौगोलिक इलाके में है जो उत्तर पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ता है।  एशिया प्रशांत इलाके में यह काफी व्यस्त परिवहन और यातायातत अड्डा है। लेकिन राजनीतिक वजहों से ताइवान को  इंटरपोल की गतिविधियों में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जाती है। ताइवान ने कहा है कि इस वजह से वह मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम की गतिविधियों में भाग नहीं ले पाता है।  ताइवान ने कहा है कि वैश्विक सुरक्षा और सामाजिक न्याय  को छोड़ कर राजनीतिक वजहों को तरजीह नहीं दी जानी चाहिये। ताइवान ने कहा है कि आधुनिक दुनिया में आन लाइन और अऩ्य तरह के अपराध किसी राष्ट्रीय सीमा को नहीं पहचानते इसलिये इंटरोपोल को ताइवान जैसी अङम अर्थव्यवस्था वाले देश का सहयोग लेना चाहिये।

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