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स्पेशल रिपोर्ट: अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन से ताइवान बाहर

ताइवान की प्रधानमंत्री
फोटो सौजन्य- गूगल

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मंचों से ताइवान को बाहर रखने की चीन की रणनीति के अनुरूप एक बार फिर ताइवान को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में भाग लेने से रोक दिया गया है।





यह सम्मेलन अगले महीने के मध्य चिली में गो ले 15 दिसम्बर तक होगा। पर्यावरण बदलाव पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की कांफ्रेंस आफ पार्टीज (सीओपी) के 25वें सत्र की अगली बैठक में ताइवान को भाग लेने की इजाजत नहीं दी गई है। यहां राजनयिक सूत्रों के मुताबिक चीन के दबाव की वजह से ताइवान को भाग लेने से रोका गया।

ताइवान के पर्यावरण संरक्षण मंत्री चांग ची छेन की शिकायत है कि पर्यावरण बदलाव रोकने में ताइवान के योगदान को मान्यता नहीं दी जा रही है। ताइवान के मंत्री ने कहा कि वैश्विक गांव के एक सदस्य के नाते संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के साथ मिल कर ताइवान इस पृथ्वी को बचाने के लिये भऱसक प्रयास कर रहा है। चांग ची छेन के मुताबिक भविष्य की पीढ़ियों के लिये एक टिकाऊ पर्यावरण प्रदान करने के लिये ताइवान असाधारण योगदान कर रहा है।

चांग चीच छेन ने कहा कि पर्यावरण बदलाव रोकने के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से ताइवाव को बाहर रखने के बावजूद ताइवान अपना योगदान करता रहेगा। उन्होंने कहा कि राजनयिक पूर्वाग्रहों की वजह से ताइवान को अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर रखना अनुचित औऱ अन्यायपूर्ण है। पर्यावरण बदलाव रोकने में सभी देशों से अपील की जाती है कि वह अपना योगदान करे लेकिन इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में ताइवान को बाहर रखना विश्व संगठनों के कार्य में विरोधाभास दिखता है।

ताइवान के मंत्री ने कहा कि ताइवान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक जिम्मेदार और गम्भीर सदस्य है और वह अपना योगदान करने को तैयार है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हमें अपने अनुभवों को बांटने में खुशी होगी। मंत्री छेन ने कहा कि उनका मानना है कि पर्यावरण बदलाव में योगदान देने में ताइवान एक मूल्यवान सहयोगी बन सकता है।

छेन ने कहा कि एक ओर जहां दुनिया पर्यावरण बदलाव के संकटों से जूझ रही है इस वैश्विक मसले को हल करने के लिये दुनिया में सभी का साथ लेना होगा। उन्होंने कहा कि ताइवान अपनी ओर से अपने मुल्क में पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिये सभी जरुरी कदम उठा रहा है जिसके अनुभव वह विश्व समुदाय से बांटना चाहेंगे।

गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना एक प्रांत और अपना हिस्सा बताता है। इसी आधार पर वह किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन या मंच पर ताइवान को बाहर रखने का दबाव डालता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य होने के नाते चीन के दबाव को अंतरराष्ट्रीय संगठन स्वीकार करने को बाध्य होते हैं।

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