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स्पेशल रिपोर्ट: प्रधानमंत्री मोदी अंतिम विदेश दौरे पर मालदीव जाएंगे

पीएम मोदी मालदीव दौरे पर
फाइल फोटो

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी अपने मौजूदा कार्यकाल के अंतिम विदेश दौरे पर 17 मार्च को मालदीव जाएंगे। यहां विश्वस्त राजनयिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी का मालदीव का यह दूसरा दौरा होगा।





माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के आगामी मालदीव दौरे से भारत और मालदीव के बीच सामरिक रिश्ते फिर पुरानी पटरी पर आ जाएंगे।

पिछली बार वह 17 नवम्बर को एक दिन के दौरे पर मालदीव के नये राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सालेह के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर गए थे। प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यकाल में नवम्बर, 2018 के पहले मालदीव इसलिये नहीं जा सके थे कि वहां के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद यामीन ने चीन के साथ नजदीकी बढ़ाकर भारत के सामरिक हितों को चोट पहुंचाई थी। अब्दुल्ला यामीन का साल 2012 के बाद से मालदीव का शासन तानाशाही रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को सत्ताच्युत कर सरकार अपने कब्जे में किया था। इसके बाद से ही भारत और मालदीव के रिश्तों  में तनाव पैदा हो गया।

यहां राजनयिक सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की भारत विरोधी नीतियों से अपना विरोध दिखाने के लिये ही मालदीव का दौरा नहीं किया था।  दक्षिण एशियाई देशों में मालदीव ही ऐसा देश बचा था जहां प्रधानमंत्री मोदी आधिकारिक दौरे पर नहीं गए थे।

अब मालदीव के नये राष्ट्रपति सालेह ने भारत के साथ पुराने रिश्तों को बहाल किया है इसलिये प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के सद्भावना दौरे पर जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी मालदीव को कई तरह की वित्तीय सहायता की घोषणा कर सकते हैं ताकि मालदीव चीन के कर्ज के जाल से बाहर निकल सके।

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का आगामी मालदीव दौरा दो दिनों   का होगा। वह रविवार 17 मार्च को मालदीव की राजधानी माले पहुंचेंगे और 18 मार्च को उनकी मालदीव के राष्ट्रपति के साथ आपसी रिश्तों को गहरा करने के उपायों पर बातचीत होगी।

गौरतलब है कि मुहम्मद सालेह के गत वर्ष नवम्बर में सत्ता सम्भालने के बाद  पिछली  मालदीव सरकार के चीन समर्थक कई फैसलों को पलटा है। भारत और मालदीव के बीच रक्षा रिश्ते और आदान प्रदान फिर  सामान्य होने लगे हैं।

केरल के समुद्र तट से करीब 500 किलोमीटर दूर स्थित मालदीव की भारत के लिये विशेष सामरिक अहमियत है। इसलिये यहां चीन को पांव पसारने में मालदीव की पिछली सरकार द्वारा मदद करने से भारत चिंतित था।

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