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खास रिपोर्ट: गिलगित-बालटिस्तान के लोग चलाएंगे ट्वीटर अभियान

गिलगित-बलाटिस्तान की आवाम
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली।  28 अप्रैल, 1949 को सम्पन्न हुए कराची समझौते की 70वीं सालगिरह के मौके पर गिलगित-बालतिस्तान के लोगों ने  ट्वीटर अभियान  शुरू कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी वास्तविकता से अवगत कराने का अभियान शुरू किया।





इसके लिये गिलगित बालतिस्तान अवेयरनेस टीम बनाई गई है जो दुनिया को बताएगी कि किस तरह धोखे से गिलगित बालतिस्तान को आजाद कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर इलाका) और पाकिस्तान का हिस्सा बनाया गया।

कराची समझौते के जरिये पाकिस्तान सरकार और आजाद कश्मीर सरकार के बीच सम्बन्धों की व्याख्या की गई थी। इसके जरिये पाकिस्तान सरकार और आजाद कश्मीर के बीच कार्य विभाजन तय किया गया था। इस समझेते के जरिये आजाद कश्मीर की सरकार ने  गिलगित-बालतिस्तान पर पाकिस्तान के पूर्ण आधिपत्य की सहमति दी और इसके जरिये इस इलाके की रक्षा, विदेश और संचार नीति के संचालन का अधिकार पाकिस्तान सरकार को प्रदान किया। इस इलाके को तब नारदर्न एरियाज कहा जाता था। इसके तहत गिलगित और लद्दाख इलाकों के सभी मामलों की देखभाल की जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार को सौंपी गई।

जम्मू-कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ क्रिस्टोफर स्नीडेन ने इस बारे में टिप्पणी की है कि  आजाद कश्मीर के तब के प्रधानमंत्री कहे जाने वाले सरदार इब्राहीम ने यह तर्क दिया था कि  गिलगित बालतिस्तान और आजाद कश्मीर के बीच सम्पर्क बहुत कमजोर है जब कि पाकिस्तान सरकार इस इलाके पर शासन पेशावर औऱ रावलपिंडी से बेहतर तरीके से कर सकती है।

गिलगित बालतिस्तान के लोगों ने कराची समझौते का इस आधार पर विरोध किया था कि इसमें उनके जनप्रतिनिधियों का कोई प्रतिनिधित्व औऱ भूमिका नहीं थी।

गौरतलब है कि गिलगित बालतिस्तान के लोग अपने इलाके की आजादी की मांग के लिये संघर्ष कर रहे हैं। अपने अधिकारों औऱ आजादी की मांग करने वाले लोगों के साथ पाकिस्तान ब्रर्बर तरीके से पेश आती है।

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