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स्पेशल रिपोर्ट: आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो पाक होगा काली सूची में

पाक पीएम इमरान खान
फाइल फोटो

नई दिल्ली। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाने से पाकिस्तान की परेशानी आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। गौरतलब है कि आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय मदद रोकने वाले अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स फाइनेनशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान से कहा है कि  वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा  प्रतिबंधित सभी आतंकवादियों के खिलाफ दिखाई पड़ने योग्य कदम उठाए।





एफएटीएफ की अगली बैठक एक महीने बाद जून में ही होने वाली है और तब तक पाकिस्तान को अपने द्वारा उठाए गए कदमों का रिपोर्ट कार्ड पेश करना होगा। गौरतलब है कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल किया है और चेतावनी दी है कि यदि आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाने वाले जरूरी कदम नहीं उठाता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।

पाकिस्तान यदि एफएटीएफ की काली सूची में शामिल कर लिया जाता है तो इससे पाकिस्तान पर कई और तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लग जाएंगे। सबसे  बड़ी बात यह होगी कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा निधि (आईएमएफ) पाकिस्तान को किसी तरह का कर्ज नहीं दे पाएगा। काली सूची में आने से पाकिस्तान के दूसरे देशों के साथ भी आर्थिक रिश्तों पर प्रतिकूल असर पडेगा।

गौरतलब है कि एफ ए टी एफ की पिछली बैठक फरवरी में हुई थी जिसमें पाकिस्तान का नाम ग्रे-लिस्ट में बनाए रखने का फैसला किया गया था। इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यदि आप एफएटीएफ के प्रेस बयान देखें तो साफ होगा कि एफएटीएफ  द्वारा सुझाए गए एक्शन प्लानों में से एक यह है कि पाकिस्तान को यह दिखाना होगा कि 1267 और 1373 प्रतिबंध समितियों द्वारा घोषित सभी कदमों को लागू करना होगा और प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ सभी  निर्देशित कदम उठाने होंगे।

इस के तहत पाकिस्तान को आतंकवादियों द्वारा धन और चंदा इकट्ठा करने की सभी कार्रवाई रोकनी होगी। इनकी  सम्पत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करना होगा और एफएटीएफ की अगली बैठक जब जून में होगी तो पाकिस्तान को इस बारे में पूरी रिपोर्ट देनी होगी।

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