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स्पेशल रिपोर्ट: पाकिस्तान की मिसाइल या जादुई छड़ी ?

नस्र बैलिस्टिक मिसाइल

नई दिल्ली। पाकिस्तान ने ऐसी मिसाइल के परीक्षण का दावा किया है जो  भारत की एस-400  एंटी मिसाइल प्रणाली को भेदने में कामयाब हो सकती है। पाकिस्तानी सेना ने एक आधिकारिक जानकारी में दुनिया को यह समझाने की कोशिश की है कि नस्र नाम की मिसाइल पाकिस्तान की सेना में शामिल हो चुकी है और यह परीक्षण सेना द्वारा किया गया था।





पाकिस्तान का यह दावा कितना सही है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी मिसाइल  वैज्ञानिक मिसाइलों  का  विकास जादुई छ़ड़ी की तरह करने लगे हैं। मिसाइलों का अपने बलबुते  डिजाइन व विकास करने के लिये किसी भी देश  के पास समुचित वैज्ञानिक आधार और ढांचा होना चाहिये  जिस पर पाकिस्तान किसी भी पैमाने पर खरा नहीं उतरता है  लेकिन बड़ी बड़ी डींग हांकना कोई पाकिस्तानी सेनाओं से सीखे।

वास्तव में जिस नस्र बैलिस्टिक मिसाइल के दूसरे सफल परीक्षण का पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह  दावा किया था वह पाकिस्तान की सेना द्वारा आयातित मिसाइल  है और  पाकिस्तान  अपनी जनता औऱ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह बरगलाने की कोशिश करता है कि वह मिसाइलों का आयात नहीं करता बल्कि अपने देश में विकास और निर्माण करता है।

पाकिस्तान का दावा है कि सतह से सतह पर मार करने वाली नस्र मिसाइल अपने पड़ोस में तैनात किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (बीएमडी) प्रणाली को भेद सकती है।  पाकिस्तान का इशारा भारत की ओर था जिसने हाल  में रुस से एस- 400 एंटी मिसाइल प्रणाली के आयात का सौदा किया है। रूस से ऐसी पांच मिसाइल प्रणाली करीब सवा पांच अरब डॉलर की लागत से आयात होगी। ये मिसाइलें 2022 तक भारत के बडे शहरों की रक्षा के लिये तैनात हो जाएंगी।

एस-400  एंटी मिसाइल दुनिया की किसी भी हमलावर मिसाइल को आसमान में ही ध्वस्त करने की क्षमता रखती है और इसी वजह  से इसे चीन ने भी अपने बड़े शहरों की रक्षा के लिये तैनात करना शुरु किया है। यदि चीन को लगता कि उसकी नस्र नाम की मिसाइल एस-400 के सुरक्षा कवच को भेद सकेगी तो चीन  एस- 400 को कतई इसे नहीं खरीदता।

नस्र के परीक्षण का ऐलान करते हुए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि यह परीक्षण पाकिस्तान की आर्मी स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड के ट्रेनिंग अभ्य़ास के तहत किया गया। यानी कि पाकिस्तानी सैनिक नस्र मिसाइल का संचालन सीख रहे थे। इसके पहले पाकिस्तानी सेना ने एल-वाई-80 लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का पिछले जनवरी माह में परीक्षण का दावा किया था। इसकी मारक दूरी 1,300 किलोमीटर बताई थी।

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