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स्पेशल रिपोर्ट: पाक आतंकवादी मदद देने वालों की काली सूची में

आतंकवादी के हिंसा का रास्ता छोड़
फाइल फोटो

नई दिल्ली। आतंकवादी गतिविधियों को मदद देने वाली हरकतों पर समुचित तौर पर काबू नहीं पाने की वजह से पाकिस्तान को फाइनेनशियल एक्शन टास्क फोर्स के एशिया पैसिफिक ग्रुप( एपीजी ) द्वारा काली सूची में डाल दिया गया है। पाकिस्तान की  डांवाडोल होती अर्थव्यवस्था के  मद्देनजर एपीजी का यह  फैसला पाकिस्तान को भारी मुश्किल में डाल सकता है।





 एशिया पैसिफिक ग्रुप फाइनांशियल  एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के नौ  क्षेत्रीय सम्बद्ध संगठनों में से है। इस एपीजी ने कहा है कि पाकिस्तान ने इसके मानकों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की है। जानकारों के मुताबिक आतंकवाद और पैसों के गोरखधंधो  को रोकने के लिये पाकिस्तान को जो कदम उठाने थे उनमें कई कमियां रह गई हैं। पाकिस्तान ने इस बारे में जरुरी कदम नहीं उठाए। एपीजीकी बैठक में यह नतीजा निकला कि पाकिस्तान ने 40 में से 32 पैमानों पर जरूरी कार्रवाई नहीं की  है।

जानकारों के मुताबिक 41 सदस्यों के इस समूह को पाकिस्तान ने  भरोसा दिलाने की पूरी कोशिश की कि उसे किसी एक पैमाने पर भी उंची श्रेणी में रखा जाए। पाकिस्तान को काली सूची में डालने का फैसला आस्ट्रेलिया के कैनबरा में एपीजी की बैठक में लिया गया।  इस बैठक के दौरान ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने एक ट्वीट में आरोप लगाया कि पाकिस्तान को काली सूची में डालने के लिये भारत लाबीईंग कर रहा है।

पाकिस्तान के  लिये यह चिंता की बात है कि  काली सूची में डाले जाने के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से कर्ज लेने में दिक्कतें होंगी और विदेशी निवेशक भी पाकिस्तान जाने से कतराएंगे।  गौरतलब है कि  गत जून माह में  फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स ने कहा था कि  आतंकी तत्वों को वित्तीय मदद रोकने पर कोई एक्शन प्लान लागू नहीं कर सका। टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि  अक्टूबर तक अपने वादों को पूरा नहीं किया तो इसके खिलाफ कार्रवाई होगी।  गत  बुधवार को  पाकिस्तान ने टास्क फोर्स के समक्ष 27  बिंदुओं वाला एक्शन प्लान पेश किया था।

 बुधवार को एपीजी की बैठक में पाकिस्तान ने अपना नाम काली सूची में नहीं डालने की पूरी कोशिश की लेकिन एपीजी के सदस्यों को पाकिस्तान का जवाब भरोसेमंद नहीं लगा।

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