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स्पेशल रिपोर्ट : अब चीन की पहल पर दक्षिण एशिया के देश एक मंच पर

खुनमिंग(चीन)। दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक व व्यापारिक रिश्ते गहरे करने के लिये चीन ने चीन-दक्षिण एशिया सहयोग फोरम (सीएसएसीएफ) की स्थापना की अहम पहल की है जिसके जरिये दक्षिण एशिया के देशों को एक मंच पर लाकर आपसी व्यापार और आर्थिक रिश्तों को गहरा करने में मदद मिलेगी।





अंतरराष्ट्रीय आर्थिक जगत में अपनी प्रभावशाली मौजूदगी बनाने के लिये चीन का पाओ फोरम पहले से ही चल रहा है। अब चीन का यह नया क्षेत्रीय आर्थिक मंच दक्षिण एशिया में चीन का आर्थिक दबदबा स्थपित करने में मदद करेगा। चीन-दक्षिण एशिया फोरम की स्थापना के साथ चीन-दक्षिण एशिया प्रदर्शनी में भाग ले रहे भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधियों ने टिप्पणी की कि भारत को भी चीन की इस पहल से सबक लेना चाहिये और अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक व व्यापारिक एकीकरण की समान रणनीति पर काम करना चाहिये।

इस फोरम की स्थापना के साथ ही यहां चाइना साउथ एशिया एक्सपो का भव्य आयोजन हुआ जिसमें सभी दक्षिण एशियाई देशों ने अपनी भागीदारी की। इस एक्सपो में हालांकि भारत की कम्पनियों के 250 स्टाल ही थे, लेकिन माना जा रहा है कि खुनमिंग एक्सपो को भारतीय व्यापारी अधिक दिनों तक नजरअंदाज नहीं कर सकते। उनके लिये चीन के बाजार में प्रवेश करने का सुनहरा मौका साबित होगा।

हालांकि चीन दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क का पर्यवेक्षक देश है जिसके जरिये वह सार्क के सदस्य देशों के साथ आर्थिक रिश्ते गहरे कर सकता है लेकिन सार्क के निष्क्रिय रहने की वजह से वह सार्क देशों में घुसपैठ नहीं कर पा रहा था। लेकिन अब चीन की यह पहल दक्षिण एशियाई देशों को एक मंच पर लाने में तो मदद करेगी ही दक्षिण एशियाई देशों के बीच भी आपसी व्यापार को बढ़ावा देगी।

चीन के युननान प्रांत की राजधानी खुनमिंग में चीन-दक्षिण एशिया फोरम का सचिवालय भी स्थापित करने का फैसला किया गया है ताकि पाओ फोरम की तरह चीन – दक्षिण एशिया सहयोग मंच को एक संस्थागत स्वरूप दिया जा सके। चीन ने इस फोरम की अहमियत बताने के लिये दक्षिण एशियाई देशों के व्यापारिक और अकादमिक जगत के आला प्रतिनिधियों  को आमंत्रित कर क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को गहरा करने के मसले पर चर्चा की। चीन का यह इलाका भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों के नजदीक है इसलिये इस इलाके को भारत से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि भारत के विशाल बाजार का दोहन किया जा सके। इस फोरम में हालांकि भारत से कोई आला अधिकारी भाग लेने खुनमिंग नहीं गया लेकिन उसकी भरपाई चीन के क्वांगचओ शहर में भारत के महावाणिज्य दूत साइलस थंगल ने अपनी मौजूदगी से की और चीनी अधिकारियों को प्रभावित किया। दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते एक्सपो में भाग ले रहे सभी देशों के व्यापारिक प्रतिनिधियों की भारत की भागीदारी पर नजर थी।

चीन ने अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक व व्यापारिक रिश्ता गहरा करने के लिये अपने सीमांत प्रांतों को अग्रणी भूमिका दी है। चीन-दक्षिण एशिया फोरम और एक्सपो के आयोजन में यहां युननान प्रांत की अग्रणी भूमिका देख कर लगा कि भारत की केन्द्रीय सरकार को अपने सीमांत प्रांतों को पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक सम्बन्ध बनाने में बढ़ावा देना चाहिये। खुनमिंग के एक्सपो के आयोजन औऱ चीन-दक्षिण एशिया मंच की स्थापना में युननान प्रांत की भूमिका तो दी ही गई उसे सहयोग देने के लिये चीन की केन्द्र सरकार के वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों के आला अधिकारी भी मौजूद दिखे। चीन-दक्षिण एशिया फोरम की स्थापना और एक्सपो के उद्घाटन के मौके पर चीन के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय के आला अधिकारियों ने अपनी मौजूदगी से इसे राष्ट्रीय पहचान दी।

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