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स्पेशल रिपोर्टः मोदी-शी बैठक के पहले डोकलाम पर भारत का अहम बयान

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग
पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी चिन फिंग (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। जोहानीसबर्ग में 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग की मुलाकात के पहले भारत ने फिर दोहराया है कि पिछले साल 28 अगस्त को भूटान के डोकलाम इलाके से दोनों देशों के सैनिकों की वापसी के बाद यथास्थिति बनी हुई है।





नरेन्द्र मोदी और शी चिन फिंग के बीच मुलाकात के पहले न केवल भारत की ओर से यह अहम बयान आया है बल्कि राजनयिक पर्यवेक्षक इसे भूटान और चीन के आला अधिकारियों के बीच डोकलाम मसले पर हुई बातचीत से भी जोड़ कर देख रहे हैं।

वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस में चल रही सुनवाई के दौरान एक सदस्य एने वागनर द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में अमेरिकी विदेश विभाग की अधिकारी एलिस जी वेल्स ने कहा कि भारत अपनी उत्तरी सीमाओं की दृढ़ता से रक्षा कर रहा है और यह भारत के लिये चिंता की बात है।

गौरतलब है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि डोकलाम में चीन ने नए निर्माण किये हैं। इस बारे में यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी के हवाले से जो बातें कही गई हैं वे सच नहीं हैं। प्रवक्ता ने दोहराया कि 28 अगस्त को भारत और चीन के सैन्य कर्मियों के पीछे हटने के बाद वहां के हालात में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

प्रवक्ता ने कहा कि तब से वहां के इलाके में कोई नई बात नहीं हुई है और वहां यथास्थिति बनी हुई है।

उल्लेखनीय है कि जोहानीसबर्ग में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिन फिंग की मुलाकात के पहले भूटान की राजधानी थिम्पू में चीन के विदेश उप मंत्री और अन्य आला राजनयिकों की भूटान के राजा सहित शीर्ष नेतृत्व से अहम बातचीत हुई है। चूंकि भूटान और चीन के बीच कोई औपचारिक राजनयिक सम्बन्ध नहीं है इसलिये माना जा रहा है कि भूटान के राजा और विदेश मंत्री के साथ चीनी विदेश उपमंत्री की मुलाकात भारत की सहमति से ही हुई है। इन मुलाकातों के बारे में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भूटान औऱ चीन के बीच कई मसलों पर सहमति हुई है।

भारतीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि डोकलाम के मसले पर चीन और भूटान के बीच अहम बातचीत हुई है। उल्लेखनीय है कि डोकलाम के इलाके पर भूटान का दावा है लेकिन वहां चीन की सेना ने डेरा जमाया हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक चीन भूटान को यह पेशकश कर रहा हैकि वह डोकलाम चीन को दे दे और बदले में भूटान चीन की दक्षिणी सीमा के इलाके में बड़ा भूभाग चीन से ले ले।

 

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