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स्पेशल रिपोर्ट: मालदीव की विदेश नीति में भारत- प्रथम पर जोर

सुषमा स्वराज और मालदीव के राष्ट्रपति सालेह

नई दिल्ली। मालदीव ने भारत को भरोसा दिया है कि उसकी विदेश नीति में भारत-प्रथम पर जोर दिया जाएगा और वह भारत की सुरक्षा और सामरिक चिंताओं को लेकर संवेदनशील रहेगा।





पिछले साल मालदीव में इब्राहीम सोलेह की अगुवाई में गठित नई जनतांत्रिक सरकार के बाद से ही मालदीव ने चीन से दूरी बनानी शुरु की है और अब नई सरकार के तहत मालदीव के पहले आधिकारिक दौरे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद से बातचीत के बाद जो साझा बयान जारी हुआ है इसका भारत के सामरिक हलकों में स्वागत किया जाएगा।

विदेश मंत्री स्वराज ने 17 और 18 मार्च को मालदीव के दौरे में राष्ट्रपति इब्राहीम सालेह के अलावा मालदीव की संसद के स्पीकर और कई अऩ्य मंत्रियों से मिलीं और  विभिन्न क्षेत्रों में मालदीव को कई तरह की मदद का वादा किया।

विदेश मंत्री शाहिद से दिवपक्षीय बातचीत के बाद विदेश मंत्री स्वराज ने  मालदीव की रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी , वित्त मंत्री इब्राहीम अमीर, राष्ट्रीय योजना मंत्री मोहम्मद असलम, स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल्ला अमीन, नागरिक उड्डयन मंत्री ऐशत नाहुला, संस्कृति मंत्री युमना मौमून, पर्यावरण मंत्री डा. रशीद हसन और आर्थिक विकास मंत्री फयाज इस्माइल के साथ एक साझा बैठक की और मालदीव के समग्र विकास में भारत का योगदान गहरा करने के मसले पर चर्चा की। विदेश मंत्री स्वराज ने मालदीव के गृहमंत्री इमरान अब्दुल्ला से भी अलग से मुलाकात की और आपसी सुरक्षा मसलों पर बातचीत की।

गौरतलब है कि साल  2012 में राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को कुर्सी से उतारकर सत्ता में आए अब्दुल्ला यामीन ने भारत के साथ सम्बन्धों को झटका दिया और चीन से नजदीकियां बढ़ाईं  लेकिन पिछले साल नवम्बर में वह जनतांत्रिक चुनाव करवाने को मजबूर हुए और मालदीव की जनता ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया। इसके बाद से ही मालदीव की नई सरकार ने भारत के साथ विशेष सामरिक और सुरक्षा रिश्ते बहाल करने पर जोर दिया है।

 पिछले साल 18 नवम्बर को इब्राहीम सालेह की सरकार के शपथ ग्रहण के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदीव का दौरा कर उसके साथ  रिश्तों की विशेष अहमियत बताई थी।

विदेश मंत्री स्वराज ने अपने पहले दौरे में मालदीव के आला नेताओं से कहा कि भारत मालदीव के साथ रिश्तों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है । यह रिश्ता आपसी भरोसा, पारदर्शिता , आपसी समझ और एक दूसरे के प्रति संवेदनशीलता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की पड़ोसी पहले नीति के अनुरूप भारत सरकार मालदीव के समग्र विकास में अपना हर सहयोग देने के लिये प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि अस्सी के दशक में भारत सरकार ने मालदीव की राजधानी माले में जिस अस्पताल का निर्माण करवाया था उसका भारत ने फिर नवीकरण किया है जिसके लिये मालदीव ने भारत का आभार जाहिर किया है

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