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स्पेशल रिपोर्ट: भारत व अफ्रीकी देशों बीच और गहरा होगा तालमेल

पीएम मोदी युगांडा में
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। भारत और अफ्रीका के बीच  जनता स्तर पर मेलजोल गहरा करने के इरादे से भारत ने अपने सॉफ्टपावर के जरिये पहले से बने पुल का और विस्तार किया। अफ्रीका में चीन के बढ़ते  असर के बीच भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ पुल को और विस्तार देने का यह अहम कदम उठाया है।





 अफ्रीका में पैन अफ्रीका ई-नेटवर्क स्थापित करने के इऱादे से  भारत सरकार ने टेलीकम्युनिकेशंस इंडिया लि. के साथ एक समझौता किया। ई- विद्या भारती औऱ ई- आरोग्य नेटवर्क प्रोजेक्ट के नाम से शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट  भारत और अफ्रीका के बीच एक और पुल यानी डिजिटल पुल की तरह काम करेगा। इससे भारत और अफ्रीका के लोगों के  बीच दूरी कम होगी । विभिन्न अफ्रीकी देशों के राजदूतों की मौजूदगी में   विदेश मंत्रालय और टीसीआईएल के बीच यहां सोमवार को इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर  किये गए। यह  प्रोजेक्ट इ-अफ्रीकन इ नेटवर्कप्रोजेक्ट का तकनीकी विस्तार है। 2009  से 2017  तक यह प्रोजेक्ट पहले से ही चलाया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट के फेज- 1 के तहत भारत के शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को अफ्रीका के संस्थानों से जोड़ा गया था।

अब प्रोजेक्ट के विस्तार के तहत पांच साल की अवधि में अफ्रीका के चार हजार से अधिक छात्रों को मुफ्त टेली-शिक्षा से जोड़ा जाएगा। इसके तहत अफ्रीकी डाक्टरों को मुफ्तमें मेडिकल सलाह दी जाएगी। इसके तहत चुनिंदा भारतीय शिक्षण संस्थानों को अफ्रीकी देशों  के चुनिंदा स्ंस्थानों से जोड़ा जाएगा।

इस अवसर पर विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति की प्राथमिकता में अफ्रीका सर्वोच्च स्थान दिया गया है। पिछले चार सालों में भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति द्वारा 26 दौरे हुए हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि अफ्रीकी देशों के साथ बेहतर तालमेल बनाने के लिये अफ्रीका में भारत के  18  और रेजिमेट मिशन खोलने का फैसला किया गया है। सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत अफ्रीका में अपने उद्योगपतियों सेअधिक निवेश करने को प्रोत्साहित करेगा। भारत में  डिजिटल  क्रांति की मदद से भारतीय उद्योग जगत अफ्रीका  के विकास में सहयोग देगा।

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