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स्पेशल रिपोर्ट: भारत और चीन के बीच शिखर बैठक की तैयारी

चीन के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी

कुईचओ (चीन)। भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगली सरकार बनने के पहले  ही भारत और चीन के बीच रिश्तों को और निखारने के लिये दोनों देशों के आला नेताओं और राजनयिकों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता का सिलसिला शुरू करने पर सहमति हो गई है।





यहां चल रही  बिग डेटा-2019 अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन में भाग लेने आए पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास के एक आला राजनयिक ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग का इस साल के अंत तक  भारत आने का कार्यक्रम है लेकिन इसके पहले दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर उच्चस्तरीय  बैठकों  और वार्ताओं का आयोजन होगा। इसके तहत दोनों देशों द्वारा आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिये गठित हाई लेवल मैकेनिज्म के तहत भारतीय विदेश मंत्री का अगस्त या सितम्बर में चीन का दौरा होगा। इस हाई लेवल मैकेनिज्म के तहत विदेश मंत्रियों की दिवपक्षीय बैठक के लिये पिछले साल नवम्बर में चीन के विदेश मंत्री वांग ई भारत आए थे। इसलिये इस बार भारतीय विदेश मंत्री को चीन जाना होगा। पेइचिंग में भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अकीनो विमल ने यहां एक बातचीत में कहा कि नई सरकार के सत्ता ग्रहण करने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और गति पकड़ेंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में चीन के वूहान शहर में भारत और चीन के शिखर नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर बैठक के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन गए थे। इसी दौरान दोनों नेताओं ने यह तय किया था कि दोनों देशों के बीच आपसी मसलों को सुलझाने और वार्ता प्रक्रिया को जारी रखने के लिये विदेश मंत्रियों की अध्यक्षता में एक हाई लेवल मैकेनिज्म गठित होगी। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दोबारा सत्तारुढ़ होने की अपेक्षा में चीन के राष्ट्रपति का कार्यालय भारतीय प्रधानमंत्री से जल्द  मुलाकात की सम्भावनाएं खोजने लगा था। माना जा रहा है कि विदेश मंत्रियों की हाई लेवल मैकेनिज्म  की बैठक इसी सिलसिले में करने का फैसला किया गया है। दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिन फिंगके बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक की जमीन  तैयार होगी। हाई लेवल मैकेनिज्म की बैठक के अलावा दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को भी गहराई देने के लिये दोनों देशों के आधिकारिक और गैर-आधिकारिक उच्चस्तरीय आदान-प्रदान का सिलसिला भी चलेगा।

यहां भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अकीनो विमल ने बताया कि भारत और चीन के बीच आपसी व्यापार जल्द ही रिकार्ड एक सौ अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह व्यापार काफी हद तक चीन के पक्ष में झुका हुआ है जिसे संतुलन देने के लिये भारतीय उद्यमियों को ही विशेष प्रयास करने होंगे। डीसीएम ने इन बातोंको गलत बताया कि चीन के दवा क्षेत्र में भारतीय फार्मा उद्योग को प्रवेश करने में चीन सरकार की ओर से विषेष अड़चन डाली जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मा उद्योग चीन पर उतना ध्यान नहीं देता जितना यूरोप और अमेरिका के बाजार पर देता है। चीन के फार्मा उद्योग में प्रवेश करने के लिये भाषा एक बड़ी अड़चन जरूर कही जा सकती है। उन्होंने बताया कि चीन सरकार फार्मा उद्योग के लिये भारत विशेष नियम नहीं बनाता है।
डीसीएम अकीनो विमल  ने कहा कि वूहान की अनौपचारिक शिखर बैठक के बाद भारत और चीन ने आपसी रिश्तों में कई तरह से ठोस आकार प्रदान किया है। वूहान के बाद भारत और चीन ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं जिनकी बदौलत दोनों देशों के रिश्ते और आगे बढ़ेंगे।

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