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स्पेशल रिपोर्ट: फिजी में हिन्दी सम्मेलन मारीशस से भिन्न होगा

किरणमाला सिंह

नई दिल्ली। दक्षिण प्रशांत महासागर के देश फिजी में अगले विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजन के फैसले से फीजी के हिंदी भाषी लोग काफी उत्साहित हैं और वे गर्व महसूस कर रहे हैं कि पहली बार विश्व हिंन्दी सम्मेलन का आयोजन फिजी की राजधानी सुवा में होगा।





18 से 20 अगस्त तक मारीशस में सम्पन्न हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग ले कर भारत आयीं फिजी की हिन्दी शिक्षिका किरण माला सिंह ने यहां एक बातचीत में बताया कि दुनिया के जिन  द्वीपों पर जहां भी भारतवंशी हैं उनमें  केवल फिजी में ही सबसे अच्छी हिंदी बोली जाती है और वहां की राष्ट्रभाषा हिंदी है। स्वदेश लौट कर किरणमाला सिंह 2021 में होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन की तैयारी में जुट जाएंगी। यह आयोजन फीजी में भारतीय उच्चायोग, फिजी सरकार और फीजी के हिंदीभाषियों के सहयोग से होगा।

किरणमाला सिंह ने बताया कि फिजी में दसवीं तक हिन्दी की पढ़ाई अनिवार्य है और वहां हिंदी में दैनिक और साप्ताहिक अखबार के अलावा रेडियो औऱ टेलीविजन चैनलों पर हिंदी के कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हैं। हिंदी वहां बोलचाल की भाषा है और दूसरे फिजी वासी भी हिंदी जानते हैं। हालांकि फिजी में अब भारतीय समाचार और मनोरंजन चैनल काफी लोकप्रिय होते जा रहे हैं। भारतीय फिल्में तो लोकप्रिय हैं हीं।  फिजी की नौ लाख की आबादी में करीब साढे तीन लाख हिंदी भाषी हैं। वहां गिरजाघरों से लेकर सभी धार्मिक स्थलों में हिंदी को बढ़ावा दिया जाता है।

किरणमाला सिंह के मुताबिक करीब 330 द्वीपों वाले देश फिजी में काफी लोग भारत को ठीक से नहीं जानते। वे भारत को लेकर अंधेरे में हैं। फिजी आज भी काफी हद तक गन्ने की खेती पर निर्भर है। फिजी के लोग भारत से कृषि की नई तकनीक सीख सकते हैं।  अंग्रेजों द्वारा भारतीय लोग दो सौ साल पहले गन्ने की खेती के लिये ही वहां भेजे गए थे। गिरमिटिया के नाम से ज्ञात ये लोग केवल एक जोड़ी कपड़े के साथ गए थे लेकिन अपने साथ वे  अपनी भाषा और संस्कृति  भी लेकर गए थे। वे रामचरित मानस भी अपने साथ ले गए थे और आज भी वहां रामायण पाठ काफी लोकप्रिय है।

किरणमाला कहती हैं कि फिजी में विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन के फैसले से हम इतना गर्व महसूस करते हैं कि लगता है कि हम भारत के साथ जुड़े हिंदी के पुल पर खड़े हो गए हैं। हमारी कोशिश होगी कि अगला विश्व हिन्दी सम्मेलन मारीशस से हुए सम्मेलन से कुछ भिन्न हो। हम इस सम्मेलन के जरिये फिजी में हिंदी का झंडा लहराना चाहते हैं।

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