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Special Report: चीनी मिसाइलों से अमेरिकी पोतों की दादागीरी पर आंच

चीनी युद्धपोत
फाइल फोटो

नई दिल्ली। अमेरिकी नौसेना अपने विशालकाय विमानवाहक पोतों की बदौलत पूरी पृथ्वी पर दादागीरी कर रही थी लेकिन अब चीनी समुद्री मिसाइलें अमेरिकी नौसैनिक ताकत के लिये बड़ी चुनौती और खतरा बन कर उभर रही हैं। चीन के तेजी से बढ़ते मिसाइल भंडार की वजह से अमेरिकी सामरिक विशेषज्ञ चिंतित हैं और उन्हें लग रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने प्रशांत और अटलातिंक महासागर में जो बढ़त हासिल की थी वह न केवल घटने लगी है बल्कि वह अमेरिकी नौसैनिक पोतों के लिये खतरा भी साबित होने लगी है।





यहां सामरिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिका ने रूस के साथ इंटरमीडियट रेंज न्युक्लियर फोर्सेज(आईएनएफ) संधि को इसलिये तोड़ा है कि चीन इस संधि से बंधा नहीं है और वह बेधड़क नई संहारक और मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास करता जा रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस संधि की वजह से अमेरिका ने नई मारक क्षमता वाली मिसाइलों का विकास और उत्पादन रोक दिया था जिससे चीन के पास अब बेहतर संहारक क्षमता हासिल हो गई है।

अमेरिका को चिंता है कि नई मिसाइल क्षमता की वजह से चीन एशिया में सबसे बडी सैनिक ताकत की जगह अमेरिका से छीन सकता है। वास्तव में चीन के पास अब इतनी ताकत हो चुकी है कि वह अमेरिकी रणनीतिकारों को अपनी रणनीति बदलने को मजबूर कर रहा है। अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि चीन ने   अपनी मिसाइल क्षमता में तब भारी विकास  और बढ़त जारी रखी जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा चीन के साथ सामंजस्य की बात कर रहे थे।

हालांकि अमेरिकी नौसेना के पास कुल 11 विशालकाय विमानवाहक पोत हैं और चीन के पास केवल दो ही हैं लेकिन अमेरिका  के लिये चिंता की बात यह हो गई है कि चीन ने इन पोतों को तबाह करने वाली ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हासिल कर ली हैं कि अमेरिका जब अपने पोतों से चीन को धमकी देगा तब चीन अपनी मिसाइलों से अमेरिकी पोतों को ही बीच समुद्र में डुबो देगा। चीन अपनी पोत नाशक मिसाइलों की ताकत दिखाकर अमेरिकी पोतों को चीनी समुद्री इलाके में घुसने से ही रोक देगा।

यहां सामरिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिकी विमानवाहक पोतों को नष्ट करने की क्षमता वाली मिसाइलों का विकास करने वाली चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के रॉकेट फोर्स की कमान चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग ने सीधे अपने  हाथ में रखी है और वह इसकी ताकत बढ़ाने वाली योजनाओं का खुद मुआयना करते हैं। चीन ने इस तरह अपने रॉकेट फोर्स की ताकत पर एशिया में अमेरिकी सैनिक प्रभुत्व को चुनौती देनी शुरू कर दी है। इस रॉकेट फोर्स में चीन के कैरियर किलर यानी पोत नाशक कहे जाने वाली  तुंगफंग- 21 डी मिसाइल का विकास और तैनाती की है और इसे सार्वजनिक कर दुनिया खासकर अमेरिका को यह चेताया है कि चीन के दक्षिण चीन सागर वाले समुद्री इलाके में चीन पर किसी तरह सैन्य धौंस दिखाने की जुर्रत नहीं करे।

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