DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: चीन के रक्षा मंत्री आएंगे भारत, सामान्य हो रहे हैं सैन्य रिश्ते

चीन के डिफेंस मिनिस्टर

नई दिल्ली। पिछले साल 72 दिनों तक भूटान के डोकलाम इलाके में चली भारत चीन सैन्य तनातनी के बाद अब दोनों देश आपसी विश्वास औऱ भरोसे का रिश्ता बनाने के लिये आने वाले सप्ताहों में कई उच्चस्तरीय बैठकों का दौर चलाएंगे।





पिछले अप्रैल में चीन के वूहान शहर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी औऱ राष्ट्रपति शी चिन फिंग के बीच हुई अनौपचारिक शिखर बैठक के बाद अब दोनों देशों के आला अधिकारियों औऱ मंत्रियों के बीच बैठकों का सिलसिला शुरु होगा। इसी कड़ी में सबसे पहले अगस्त के अंत में चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फंग ह भारत का दौरा करेंगे। यह दोनों देशों के बीच सामान्य होते सैन्य रिश्तों का सूचक है। राजनयिक सूत्रों ने यहां कहा कि चीनी रक्षा मंत्री के भारत दौरे की जमीन तैयार करने के लिये चीन के एक आला सैन्य कमांडर ने पिछले महीने ही भारत का दौरा किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच आला राजनयिक स्तर पर चीनी रक्षा मंत्री के भारत दौरे को अंतिम रूप दिया गया।

गौरतलब है कि चीनी पीएलए के पश्चिमी थियेटर कमांड के डिपुटी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ल्यू श्योओ वू ने एक सीमा रक्षा दल के शिष्टमंडल के साथ नई दिल्ली और कोलकाता में पूर्वी थलसैनिक कमांड के आला अधिकारियों के साथ सीमा पर परस्पर भरोसा बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की थी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच इन उपायों पर आम सहमति बनी थी।

सूत्रों के मुताबिक चीनी रक्षा मंत्री के भारत दौरे के बाद अक्टूबर में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मामलों के  मंत्री चाओ खछी भी भारत का दौरा करेंगे। इसी दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग ई भी भारत का दौरा कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ जनता स्तर पर रिश्तों को मजबूत करने के उपायों पर बातचीत करेंगे।

इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सीमा मसलों पर बातचीत के लिये चीनी प्रधानमंत्री के प्रतिनिध यांग च्येछी के साथ बातचीत के लिये चीन जाएंगे।

इस तरह भारत औऱ चीन के रिश्तों का कैलेंडर अगले कुछ महीनों के लिये काफी व्यस्त रहेगा।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के अलावे आर्थिक व व्यापारिक मसलों पर भी विवाद चल रहा है। तिब्बत को लेकर भारत की नीति से चीन काफी खफा है। इन सभी मसलों पर आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच दो टूक बातचीत होने की सम्भावना है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच हुई अनौपचारिक शिखर बैठक में जो दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिये गए हैं उनके आधार पर दोनों देशों के आला मंत्री और अधिकारी रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे।

 

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