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स्पेशल रिपोर्ट: 21 दिसम्बर को कश्मीर का मसला उठाएगा चीन

चीन के विदेश मंत्री वांग ई
फोटो सौजन्य- गूगल

नई दिल्ली। भारत औऱ चीन के बीच 21 दिसम्बर को मुम्बई में सीमा मसले पर बात होगी। इस बातचीत के लिये सीमा मसले पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के विशेष प्रतिनिधियों की नियुक्ति साल 2003 में की गई थी।





यह बातचीत चीन के विदेश मंत्री वांग ई औऱ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच होगी। यहां राजनयिक सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत के दौरान चीन जम्मू-कश्मीर के विभाजन का मसला उठाएगा। सूत्रों के मुताबिक भारत की ओऱ से यही जवाब दिया जाएगा कि जम्मू-कश्मीर का मसला भारत का आंतरिक मामला है और इस फैसले से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू व कश्मीर में विभाजित किया गया है।

चीन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने से चीन की सम्प्रभुता को चुनौती पैदा हुई है। चीन का कहना है कि लद्दाख का अक्साई चिन इलाका चीन का है लेकिन भारत का कहना है कि जम्मू कश्मीर के विभाजन से यथास्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि सीमा मसले पर विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत गत सितम्बर माह में ही होने वाली थी लेकिन दोनों पक्षों के कार्यक्रम मेल नहीं खाने की वजह से तय नहीं हो सकी। उसी दौरान भारत ने जम्मू कश्मीर के विभाजन का फैसला किया था जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। गत अक्टूबर माह में मम्मलापुरम में राष्ट्रपति शी चिन फिंग औऱ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद पहली उच्च स्तरीय वार्ता होने जा रही है।

राजनयिक सूत्रों ने कहा कि भारत औऱ चीन के बीच आपसी विकास साझेदारी को लेकर अनौपचारिक शिखर बैठक के दौरान जो सहमति हुई थी इसके मद्देनजर वांग ई और अजीत डोभाल की वार्ता होगी। दोनो शिखर नेताओं ने सीमा पर शांति व स्थिरता बनाए रखने की जरुरत महसूस की थी।

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