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खास रिपोर्ट: चीन ने श्रीलंका को एक युद्धपोत किया भेंट

युद्धपोत

नई दिल्ली। चीन ने श्रीलंका की नौसेना को एक आधुनिक युद्धपोत भेंट में दिया है। यहां रक्षा पर्यवेक्षकों का मानना है कि चीन ने सामरिक इरादों से श्रीलंका की नौसेना के साथ ताल्लुकात गहरे करने के लिये श्रीलंका में सामरिक निवेश किया है। श्रीलंका के साथ चीन की बढ़ती सामरिक दोस्ती भारत के लिये चिंता की बात है।





चीन ने पिछले साल जून में ही श्रीलंका को यह युद्धपोत देने का फैसला किया था। युद्धपोत बन जाने के बाद चीन ने अपने शांघाई नौसैनिक अड्डे पर श्रीलंका के 200 नौसैनिकों को दो महीने का विशेष प्रशिक्षण इस पोत के संचालन के लिये दिया था।

यहां मिली रिपोर्टों के मुताबिक श्रीलंकाई नौसेना के कमांडर वाइस एडमिरल पियाल डी सिल्वा ने चीनी युद्धपोत की अगवानी करने के बाद कहा कि श्रीलंकाई नौसेना ने चीन और श्रीलंका के बीच अच्छी दोस्ती की वजह से यह पोत लिया है।

पी- 625 वर्ग का यह फ्रिगेट समुद्र तटीय गश्ती , पर्यावरण निगरानी और समुद्री डाकाजनी के खिलाफ गश्ती करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि श्रीलंकाई नौसेना कई समुद्री चुनौतियों का सामना कर रही है। समुद्र के जरिये कई गैरकानूनी गतिविधियों का संचालन होता है। श्रीलंकाई नौसैनिक अधिकारी ने कहा कि चीन से मिले युद्धपोत के शामिल होने से श्रीलंका की समुद्र टोही और निगरानी क्षमता में भारी इजाफा होगा।

गौरतलब है कि चीन ने श्रीलंकाई बंदरगाह हमबनटोटा का विकास किया था लेकिन इसके लिये जो कर्ज श्रीलंकाई सरकार को चीन ने दिया उसकी भरपाई नहीं करने की वजह से चीन ने हमबनटोटा के निकट 15 हजार एकड़ जमीन 99 साल की लीज पर ले ली है। इस तरह चीन ने श्रीलंका में अपनी स्थाई मौजूदगी बना ली है। चीन अब श्रीलंका को दिये युद्धपोत की बदौलत श्रीलंकाई नौसेना की चीन पर निर्भरता बढ़ाएगा।

पी-625 युद्धपोत 112 मीटर लम्बा और 12.4 मीटर चौडा है जो 23सौ टन विस्थापन क्षमता का है। इस पर सतह से सतह पर मार करने वाली वाईजे- 82 मिसाइलें तैनात हैं।

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