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स्पेशल रिपोर्ट: चीन ने युद्धपोत का नाम ल्हासा रखा

चीन का युद्धपोत

नई दिल्ली। चीन ने अपने नवीनतम और सबसे बड़े विध्वंसक युद्धपोत गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर का नाम तिब्बत की राजधानी ल्हासा पर रखा है। माना जा रहा है कि चीन के इस कदम से दुनिया भर में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों में भारी रोष पैदा होगा।





टाइप- 055 वर्ग का करीब दस हजार टन विस्थापन क्षमता वाला यह युद्धपोत चीन की छिंगताओं नौसैनिक गोदी में बनाया गया है। इसे हाल में ही समुद्र में उतारा गया है। यह विध्वंसक युद्धपोत अत्याधुनिक मिसाइलों, टारपीडो और हमलावर हेलिकॉप्टरों से लैस है। चाइना मिलिट्री पत्रिका ने तिब्बत के सिविल अफेयर्स ब्यूरो के हवाले से यह जानकारी दी है। इसके नामकरण की प्रक्रिया पिछले साल के अंत में शुरु हुई थी। इंटरनेट पर लोगों से इस बारे में राय मांगी गई थी जिसमें सबसे अधिक प्रस्ताव चीन के विद्रोही प्रांत थाइवान की राजधानी ताइपेई के लिये सुझाव दिये गए थे।

चीन के नौसैनिक पोतों के नामकरण के नियमों के तहत विमानवाहक पोतों और क्रूजरों के नाम प्रांतों और क्षेत्रों के आधार पर रखे जाते हैं जब कि विध्वंसक पोतों और कार्वेटों के नाम चीन द्वारा प्रशासित शहरों के नाम पर रखे जाते हैं। चीनी जन मुक्ति सेना (पीएलए) इस पोत का नाम तिब्बत, नानिंग, क्वांगशी, नानछांग, च्यांगशी या ताइपेई भी रख सकती थी। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के पोतों के नाम भी देश के बड़े शहरों औऱ राजधानियों पर रखे जाते हैं।

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