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Special Report: भारतीय कम्पनियों को विशेष छूट दे रहा है चीन

भारत-चीन का झंडा

कुईचओ (चीन)। डिजिटल क्रांति के नये युग में चीन की पीली नदी और भारत की गंगा नदी के बीच पुनर्मिलन के लिये यहां चल रही बिग डेटा- 2019 अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में अपील की गई। चीन अपने बिग डेटा उद्योग को तेजी से आगे बढ़ाने के लिये भारतीय साफ्टवेयर कम्पनियों को विशेष रियायतें दे कर आमंत्रित कर रहा है। बिग डेटा- 2019 प्रदर्शनी में 30 से अधिक देशों की तीन सौ अग्रणी कम्पनियां भाग ले रही हैं जिनमें चीन में प्रतिबंधित गुगल कम्पनी और भारत की दो दर्जन कम्पनियां  भी शामिल है।





भारतीय दूतावास के आला राजनयिकों की मौजूदगी में यहां भारत और चीन के सूचना तकनीक विशेषज्ञों की साझा बैठक में सहयोग के कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए। चीन के डिजिटल वैली और बिग डेटा गढ़ माने जाने वाले कुईचओ प्रांत में आयोजित चीन की बिग डेटा प्रदर्शनी में भारतीय सूचना तकनीक उद्योग के संगठन नैसकाम के अलावा दो दर्जन से अधिक अग्रणी भारतीय कम्पनियों की भागीदारी है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में चीन के कुईचओ प्रांत के गवर्नर वांग शी च्ये ने कहा कि भारत और चीन को साइबर दुनिया के प्रशासन और इसकी सुरक्षा के लिये आपसी सहयोग को गहरा करना होगा। गवर्नर ने कहा कि चीन की पीली नदी और भारत की गंगा नदी के बीच आज के दौर में फिर संगम की जरूरत है ताकि दोनों देश अपने लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिये मिल कर काम कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत-चीन रिश्तों में सूचना तकनीक क्षेत्र ने आपसी सहयोग का नया अध्याय खोला है।

बिग डेटा को नई सामाजिक क्रांति का सूत्रपात करने वाला बताते हुए वांग शी च्ये ने कहा कि भारत और चीन के सहयोग से बिग डेटा उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा और भारतचीन के रिश्तों में नई गहराई आएगी। पेइचिंग में भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अकीनो विमल ने कहा कि बिग डेटा के क्षेत्र में चीनी कम्पनियों की सेवा के लिये भारतीय सूचनी तकनीक कम्पनियां तैयार हैं। इसके जरिये दोनों देशों के बीच दोस्ती के नये पुल बन रहे हैं।

इस क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने के लिये भारत ने चीन में तीन कोरिडोर बनाए हैं। इसके तहत चीनी कम्पनियां भारतीय साझेदारों की तलाश कर रही हैं। भारत और चीन के बीच आपसी व्यापार जल्द ही एक सौ अरब डॉलर को छू लेगा जिससे भारत की सूचना तकनीक कम्पनियों को चीन में अपना पांव जमाने के नये मौके मिलेंगे। छोटे और मझले आकार की भारतीय सूचना तकनीक कम्पनियां चीन के बिग डेटा क्षेत्र की रीढ़ साबित होंगी। भारत की इन कम्पनियों ने कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस- ए आई ) में दुनिया में बढ़त हासिल कर ली है जो अब चीन की बिग डेटा कम्पनियों को मदद करने के लिये तैयार हैं। इससे भारत और चीन दोनों के लिये विन-विन हालात यानी दोनों को लाभ की स्थिति पैदा होगी।

डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अकीनो विमल ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2.5 ट्रिलियऩ डॉलर हो कर दुनिया में छठे स्थान पर पहुंच गई है जो अब चीन व बाकी देशों के लिये एक बड़े बाजार के तौर पर उभर चुका है। इसलिये चीनी कम्पनियों को भी भारत के तेजी से विस्तार लेते भारतीय बाजार से लाभ उठाने के लिये तैयार रहना होगा।

भारतीय राजनयिक ने कहाकि चीन और भारत के बीच व्यापारिक और पर्यटकों की आवाजाही को बढ़ावा देने के लिये ही  ई-वीजा की व्यवस्था शुरु कीगई है जिससे भारत और चीन के बीच आपसी आर्थिक मेलजोल और आवाजाही का दायरा काफी बढ़ा है। उन्होंने कहाकि भारत ने ई-वीजा की व्यवस्था चीन से जवाबी सुविधा हासिल करने के लिये नहींकी है।यह चीन पर निर्भर करता है कि वह भारतीयों के लिये कब समान व्यवस्था लागू करे।

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