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स्पेशल रिपोर्ट: भारत के लिये मुश्किलें पैदा करता है चीन- ताइवान

राजदूत चुंग क्वांग त्येन

नई दिल्ली। ताइवान ने भारत से कहा है कि वह चीन और ताइवान के साथ समानांतर रिश्ते रखे। ताइवान के प्रतिनिधि राजदूत चुंग क्वांग त्येन ने यहां एक बातचीत में कहा कि हम चीन के साथ रिश्ते बनाए रखने की भारत की जरूरत को समझते हैं लेकिन भारत यदि ताइवान के साथ भी  समानांतर रिश्ते रखे तो इसमें कोई हर्ज नहीं।





राजदूत ने चीन पर आरोप लगाया कि वह दुनिया के हर मामले में टांग अड़ाता है और अपनी दादागीरी दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने भारत के लिये न्युक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता में अडंगा डाला है और दस साल तक आतंकवादी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने से रोका। चीन और भारत के व्यापार में भी भारी असंतुलन है जब कि ताइवान और भारत का छह अरब डालर का व्यापार संतुलित है।

गौरतलब है कि ताइवान अपने को चीन देश के तौर पर ही मानता है लेकिन ताइवान के लोगों की अपनी सरकार है जिसकी स्थापना 1947 में हुई थी। भारत ने इस सरकार के साथ दो साल तक यानी 1949 तक राजनयिक रिश्ते रखे और इसके बाद चीनी गणराज्य की स्थापना के बाद ताइवान से राजनयिक रिश्ते खत्म कर दिये। अब भारत में ताइवान का प्रतिनिधित्व ताइपेई इकोनोमिक एंड कल्चरल सेंटर (TECC)  के जरिये होता है। चीन ताइवान को विद्रोही प्रांत के तौर पर बताता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहता है कि चीन की वास्तविक सरकार राजधानी पेइचिंग में ही है। इसलिये ताइवान की सरकार के साथ कोई सम्पर्क नहीं रखे।

राजदूत चुंग ने कहा कि दुनिया के 17 देशों ने ताइवान के साथ राजनयिक सम्बन्ध रखे हुए हैं। चीन से अलग सरकार बनाने की वजह से उसे चीन सरकार से  सैनिक हमले की धमकी मिलती है और ताइवान की ओर निशाना कर चीन ने मिसाइलें  तैनात कर रखी हैं। राजदूत ने कहा कि चीन के दबाव की वजह से ताइवान को अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों से बाहर रखा जाता है।

राजदूत ने कहा कि यही वजह है कि आगामी 20 से 28 मई तक स्विटजरलैंड के जिनीवा  में  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WH0)  द्वारा आयोजित वर्ल्ड  हेल्थ एसेम्बली (WHA)  से ताइवान को बाहर रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन संयुक्त राष्ट्र के तहत संचालित होता है और ताइवान को इसकी एसेम्बली में 2009 से 2016 तक पर्यवेक्षक के तौर पर आमंत्रित किया गया लेकिन 2017 के बाद से ताइवान को वर्ल्ड हेल्थ एसेम्बली  से बाहर रखा गया। राजदूत ने आरोप लगाया कि ऐसा चीन के दबाव की वजह से हुआ है।

राजदूत ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि WHA  के सम्मेलन में ताइवान की भागीदारी का समर्थन करे। राजदूत के मुताबिक भारत दुनिया की एक बड़ी जनतांत्रिक ताकत है और अपने अधिकारों का भारत को उपयोग करना चाहिये। राजदूत के मुताबिक जापान, कनाडा, अमेरिका , दक्षिण कोरिया  और यूरोपीय यूनियन ने WHA के सम्मेलन में ताइवान की भागीदारी का समर्थन  किया है। राजदूत ने कहा कि ताइवान लातिन अमेरिकी देशों से लेकर अफ्रीकी महाद्वीप में गरीब लोगों के लिये स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाता है औऱ इस नाते विश्व स्वास्थ्य देखभाल में ताइवान की भी भूमिका है। इस नाते  WHA  में भाग लेने पर ताइवान पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य किसी राष्ट्रीय भौगोलिक सीमा को नहीं पहचानता है।

राजदूत के मुताबिक ताइवान ने अंतरराषट्रीयय स्वास्थ्य कार्यक्रम में छह अरब डॉलर से अधिक खर्च किये हैं। ये कार्यक्रम 80 से अधिक विकासशील देशों में चलाए जा रहे हैं।

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