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Special Report: बेल्ट एंड रोड सम्मेलन-  चीन ने दिए रवैया बदलने के संकेत

चीन का बेल्ट एंड रोड शिखर सम्मेलन

नई दिल्ली। चीन के बेल्ट एंड रोड शिखर सम्मेलन में  भारत सम्प्रभुता की चिंता बताकर भले ही  भाग नहीं ले रहा हो लेकिन 25 से 27 अप्रैल तक पेइचिंग में आयोजित यह दूसरा शिखर सम्मेलन अभूतपूर्व सफल कहा जा सकता है। इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने भाग लिया जब कि सौ से अधिक देशों ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों के शिष्टमंडल भेजे।





रोचक बात यह है कि पृथ्वी को सड़क, हाईवे, एक्प्रेसवे, समुद्री परिवहन आदि के जरिये जोड़ने वाली बेल्ट एंड रोड इनीशियेटिव को लेकर चल रही चीन की आलोचना को दूर करने के लिये चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग ने चीन का रवैया बदलने के संकेत भी दिए हैं। चीन ने इन परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने और कर्जों को लेकर अधिक जिम्मेदारी निभाने का वादा किया है।

सम्मेलन में भारत की तरह अमेरिका ने भी अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं  भेजा लेकिन चीन  सात अमीर देशों के संगठन जी-7 में से एक इटली को तोड़ने में कामयाब रहा औऱ इसके प्रधानमंत्री शिखर सम्मेलन में मौजूद रहे। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का भी वहां मौजूद रहना स्वाभाविक था। बेल्ट एंड रोड पहल की आलोचना के बावजूद जर्मनी  और फ्रांस ने अपने मंत्रियों की अगुवाई में शिष्टमंडल भेजकर सम्मेलन को गरिमा प्रदान की है।

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को दूर करने की कोशिश की और कहा कि बेल्ट एंड रोड पहल( बीआरआई) के प्रोजेक्ट केवल दो देशों के समझौतों के आधार पर ही नहीं बल्कि बहुपक्षीय भी होंगे। चीन को यूरोप, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों से जोडने वाली दस खरब डालर की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कई देशों को लुभा रही है। चीन की योजना  है कि इस पहल के जरिये वह पृथ्वी की सभी भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए देशों के बीच सड़क और समुद्री सम्पर्क का जाल बिछा दे और अपनी व  अन्य देशों की ऊर्जा सुरक्षा के लिये समुचित ढांचागत विकास करे।

चीन की  इस पहल से भारत को सबक लेना चाहिये और भारत को भी कम से कम अपने पडोसी देशों के साथ व्यापारिक आदान प्रदान और पर्यटन को बढावा देने के लिये ढांचागत विकास के प्रोजेक्ट पडोसी देशों के सहयोग से शुरु करने चाहिये। चीन के राष्ट्रपति ने पेइचिंग में आयोजित दूसरे शिखर सम्मेलन को सम्बोधित  करते हुए कहाकि आपसी सहयोग को और गहरा बनाने और नई ऊंचाईयों तक पहुंचने के लिये हम सभी देश अपने भविष्य को और उज्जवल बनाने की कोशिश जारी रखेंगे।

शी चिन फिंग ने बताया कि चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से 150  से अधिक देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन जुड़ चुके हैं जिसमें संयुक्त राष्ट्र और जी-20 संगठन भी शामिल हैं। चीन जिस राष्ट्रीय संकल्प के साथ बेल्ट एंड रोड पहल को आगे बढाने की कोशिश कर रहा है उससे यह साफ है कि चीन अपने को दुनिया के देशों के साथ सड़क, रेल और समुद्री परिवहन के जरिये कुछ सालों के भीतर जोड़ लेगा जिसका दोतरफा फायदा चीन को मिलेगा। चीन की इस पहल  को जिस तरह अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है उसके मद्देनजर हम यह कह सकते हैं कि चीन का अंतरराष्ट्रीय दबदबा बढ़ेगा और इसका विरोध कर रहा अकेला भारत केवल मुंह ताकता ही रहेगा।

 बेल्ट एंड रोड कार्यक्रम के बारे में चीनी राष्ट्रपति ने  सही कहा है कि बेल्ट एंड रोड के जरिये विश्व व्यापार  के लिये नया मौका प्रदान होगा और वैश्विक आर्थिक विकास के लिये नया रास्ता खोलेगा। चीनी राष्ट्रपति ने बेल्ट एंड रोड के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि इसके लिये सभी देशों के बीच बहुपक्षीय सलाहमशविरा चलते रहना चाहिये।

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