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स्पेशल रिपोर्ट: भारत की प्राचीन मूर्तियां लौटाएगा आस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारीसन
फाइल फोटो

नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया भारत से हासिल  की कई तीन प्राचीन कलाकृतियों को भारत को अगले महीने लौटा देगा। यहां आस्ट्रेलियाई दूतावास ने प्रधानमंत्री स्काट मारीसन के एक बयान के हवाले से यह जानकारी दी। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने यह जानकारी अपने बयान में देते  हुए कहा है कि यह फैसला भारत औऱ आस्ट्रेलिया के बीच गहरी दोस्ती का परिचायक है।





आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारीसन, विदेश मंत्री  मेरिसे पायन साइबर सुरक्षा मामलों  के मंत्री  पाल फ्लेचर ने एक संयुक्त बयान में इस आशय का ऐलान किया। इस संयुक्त बयान में कहा गया है कि जनवरी में आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के भारत दौरे में तीनों प्राचीन कलाकृतियों को भारत को लौटा दिया जाएगा।

 इस संयुक्त बयान के मुताबिक  ये तीनों कलाकृतियां सदभावना से खरीदी गई थीं।  लेकिन आस्ट्रेलियाई कला गैलरी द्वारा किये गए गहन शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि ये कलाकृतियां भारत की धरोहर हैं जिन्हें भारत को लौटा देना चाहिये।

 इन कलाकृतियों में  तमिलनाडू से हासिल की गई 15वीं सदी की  द्वारपाल की मूर्तियां,  राजस्थान या मध्य प्रदेश की  छठी से 8वीं सदी की नागराज मूर्तियां हैं।

 प्रधानमंत्री मोरीसन ने अपने बयान में कहा कि भारत की तरह हम भी प्राचीन कलाकृति और सास्कृतिक धरोहरों के महत्व  को समझते हैं। इसलिये इन कलाकृतियों को लौटाना सही फैसला है।

भारत और आस्ट्रेलिया सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा और इसकी अवैध तस्करीक  रोकने के लिये साल 1970 में दस्तखत की गई यूनेस्को संधि के साझेदार हैं। प्रधानमंत्री मारीसन के मुताबिक आधुनिक समाज में ऐतिहासिक कलाकृतियां अहम भूमिका निभाती हैं। आस्ट्रेलिया के साइबर सुरक्षा औऱ संस्कृति मंत्री  पौल फ्लेचर ने कहा कि  आस्ट्रेलिया नैतिक तौर पर हासिल की गई कलाकृतियों को स्वीकारता है।

गौरतलब है कि  कलाकृतियों की चोरी और तस्करी के मामले में न्यूयार्क स्थित पूर्व कला व्यापारी सुभाष कपूर के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। कपूर के जरिये ही उक्त कलाकृतियों को खरीदा गया लेकिन इसमें आस्ट्रेलिया सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

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