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स्पेशल रिपोर्ट: कश्मीर में शांति का माहौल

जम्मू-कश्मीर

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने और धारा-370 को बेअसर करने के फैसले के एक सप्ताह बाद राज्य में सुरक्षा हालात काबू में हैं। सोमवार को जहां ईद के मौके पर पूरे राज्य में शांति का माहौल बना रहा वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने श्रीनगर के लाल चौक और हजरतबल  का दौरा कर यह दिखाया है कि राज्य में शांति बनाए रखने की उनकी रणनीति कामयाब हो रही है।





सुरक्षा बलों ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत राज्य की छोटी मस्जिदों पर कश्मीरी मुसलमानों को ईद की नमाज अता करने की इजाजत दी। हजरत बल जैसी मस्जिदों पर चूंकि बड़ी संख्या में नमाजी इकट्ठा होते हैं इसलिये  बड़ी मस्जिदों पर नमाज अता नहीं करने देने की रणनीति कामयाब रही। नतीजतन श्रीनगर से लेकर पूरे प्रदेश में मस्जिदों पर लोग शांति पूर्वक नमाज अता करने गए और शांति से अपने घरों को लौट गए।

यहां एक अधिकारी ने बताया कि ईद के लिये नमाजी सुबह सात बजे ही मस्जिदों में इकट्ठा होने लगे थे। अधिकारी ने बताया कि  श्रीनगर में स्थानीय मस्जिदों पर लोग छोटी  तादाद में पहुंचे और नमाज पढकर चले गए।  श्रीनगर में आतंकवादी और पाकिस्तान समर्थक तत्व बडी भीड़ को भड़काने में कामयाब नहीं हों इसका पुख्ता इंतजाम किया गया था। इसके लिये श्रीनगर के कई इलाकों में कई तरह के सीमित प्रतिबंध भी लगाए गए थे।

अधिकारी ने बताया कि बांदीपुरा की दार उल उलीमिया मस्जिद पर 5000 लोग पहुंचे और वहां की जामा मस्जिद में  2000, बारामुला में 10,000 , कुपवाड़ा की ईदगाह में 3,500 त्रेहगाम में 3,000 , सोपोर में 1500, काजीगुंड में 5500, शोपियां में 3,000 , पुलवामा में 1800 , अवंतीपुरा में 2500, अनंतगाम में 3,000, गंदरबल में 7,000 बडगाम की चरारेशरीफ में 5000 और मगम में 8,000 के अलावा श्रीनगर की सौ से अधिक स्थानीय मस्जिदों में सैंकड़ों लोगों ने ईद की नमाज अता की।

अधिकारी ने बताया कि केवल कुछ इलाकों में  पथराव जैसे मामूली विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान पुलिस ने पत्थरबाजों को पकड़ कर पुलिस को सौंपा। इन इलाकों में एक दो लोग ही मामूली घायल हुए। अघिकारी ने कहा कि यह कोई असामान्य बात नहीं कही जा सकती क्योंकि राज्य में ऐसी वारदातें पहले  भी हुई हैं।

जम्मू कश्मीर में पिछले सप्ताह जो बंदिशें लगाई गई थीं वे धीरे धीरे हटाई जा रही हैं।  इस वजह से शनिवार को श्रीनगर में भारी संख्या में लोग घरों  से बाहर निकले।  शहर में 20 प्रतिशत दुकानें खुलीं। रविवार को सड़कों पर यातायात बढ़ने की वजह से बंदिशों में और ढील दी गई।

रविवार के दिन 50 प्रतिशत से अधिक दुकानें खुलीं जिससे लोग अपनी  जरुरत के सामान खरीद सके। दूसरी ओर जम्मू के पांच जिलों में बंदिशें पूरी  तरह हटा ली गईं हैं। बंदिशें किस स्तर तक कम की जाएं इसका फैसला स्थानीय अधिकारी और सुरक्षा बल आपसी विचार से कर रहे हैं। हालांकि संचार सम्पर्क अभी बहाल नहीं हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि संचार सम्पर्क की वजह से अफवाहें और झूठा प्रचार होता है जिसे  रोकने के लिये जरूरी है कि मोबाईल फोन और इंटरनेट पर रोक लगाई जाए।

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