International

खास रिपोर्ट: अफगानी जेहादी हक्कानी नहीं रहा

जलालुद्दीन हक्कानी

नई दिल्ली। अफगानिस्तान के जेहादी संगठन हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक  जलालुद्दीन हक्कानी की लम्बी बीमारी के बाद मौत होने की रिपोर्ट है। तालिबान ने इस आशय की जानकारी सार्वजनिक की है।





जलालुद्दीन हक्कानी कभी अमेरिका का साथी माना जाता था लेकिन अब अमेरिका हक्कानी नेटवर्क के पीछे हाथ धो कर प़़ड़ा है। हक्कानी नेटवर्क को अमेरिका अफगानिस्तान और अमेरिकी सेना के लिये सबसे बड़ा खतरा मानता है। अमेरिका ने 2012 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया था। जलालुद्दीन हक्कानी ने सत्तर के दशक में  इस जेहादी संगठन की स्थापना की थी। इन दिनों हक्कानी नेटवर्क के नजदीकी रिश्ते तालिबान और अलकायदा दोनों से बताए जाते हैं।

इस आशय की रिपोर्ट हैं कि जलालुद्दीन हक्कानी पिछले 10 सालों से लकवा से ग्रस्त था। हक्कानी को पिछले कुछ सालों से सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया था। वर्ष 2015 में ही उसकी मौत की अफवाहें तेजी से फैली थीं। लेकिन यह पहला मौका है जब हक्कानी की मौत की खबर की पुष्टि तालिबान ने की है।

अस्सी के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत सेना की मौजूदगी के दौरान जलालुद्दीन हक्कानी एक बड़ा गुरिल्ला नेता था और वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिये बड़े काम का आदमी माना जाता था। बाद में उसने  1996 में तालिबान से हाथ मिला लिया। तालिबान के एक प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहेद के मुताबिक हककानी की मौत अफगानिस्तान के अंदर सोमवार को हुई।

यहां अफगान मामलों के जानकारों का कहना है कि हक्कानी की मौत से हक्कानी नेटवर्क की अफगानिस्तान में चल रही गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हक्कानी की बीमारी के दौरान वह सक्रिय नही रह गया था। हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का गहरा समर्थन हासिल है। वास्तव में पाकिस्तान की अफगान नीति काफी हद तक हक्कानी नेटवर्क की ताकत पर ही निर्भर है। अमेरिका पाकिस्तान से लम्बे अर्से से कह रहा है कि वह हक्कानी नेटवर्क को अपनी धरती से काम नहीं करने दे। हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तानी सेना हर तरह की मदद देती है ताकि इसकी बदौलत काबुल में तालिबान को फिर सत्ता में लौटाने में मदद मिले।

Comments

Most Popular

To Top